बोकारो में महिला का कटा सिर मिला, धड़ तलाश करने में जुटी पुलिस

बोकारो में महिला का कटा सिर मिला, धड़ तलाश करने में जुटी पुलिस

बोकारो। झारखंड में बोकारो के सेक्टर-12 थाना क्षेत्र के बड़याडीह गांव के पास बुधवार को थैले में युवती का कटा सिर बरामद हुआ है। सिर लगभग 18 वर्षीया युवती का जान पड़ता है। पुलिसयुवती का धड़ तलाश करने में जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अभी भी युवती के धड़ का बरामद नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि पुलिस युवती का धड़ बरामद करने के लिए जंगलों में खोजबीन कर रही है।

बोकारो सेक्टर-12 थाना के प्रभारी जयगोविंद गुप्ता ने आज बताया कि सातनपुर के ग्रामीणों ने सूचना दी कि एक गर्दन से अलग सिर फेंका हुआ है जिसके बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर सिर को अपने कब्जे में किया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस युवती की शिनाख्त का प्रयास कर रही है। पुलिस इसे घरेलू हिंसा एवं किसी के द्वारा हत्या कर फेंके जाने सहित कई बिन्दुओ से देख रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया युवती 18 से 20 वर्ष की प्रतीत होती है। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल के निरीक्षण से ऐसा प्रतीत होता है कि युवती की हत्या कहीं और करके शव यहां फेंका गया है।


जानिए आखिर क्यों लाल, हरा और पीला ही होता है ट्रैफिक लाइट का रंग

जानिए आखिर क्यों लाल, हरा और पीला ही होता है ट्रैफिक लाइट का रंग
आजकल इंसान की स्पीड ट्रैफिक लाइट पर निर्भर करती है। दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट 10 दिसंबर, 1868 को लंदन, इंग्लैंड में संसद भवन के बाहर सड़क पर लगाई गई थी। वहीं आप नहीं जानते होंगे कि रेलवे के इंजीनियर जेके नाइट ने पहली ट्रैफिक लाइट लगाई थी। रात में इसे दिखाई देने के लिए गैस का उपयोग किया जाता था। उस समय ट्रैफिक लाइट में केवल दो रंगों का इस्तेमाल होता था जो एक लाल था और दूसरा हरा, उसके काफी समय बाद ट्रैफिक लाइट्स में पीला रंग लाया गया था।
ट्रैफिक लाइट में लाल रंग डालने का कारण लोगों को सतर्क करना था। आप जानते ही होंगे कि शुरू से ही रेड कलर का मतलब रहा है 'आगे खतरा है।' इसी बात को इंगित करने के लिए लाल रंग चुना गया था। वैसे भी हम सभी इस बात से भी वाकिफ हैं कि अन्य रंगों की तुलना में लाल रंग गहरा रंग है इसके अलावा इसे दूर से भी साफ़ देखा जा सकता है। इसी वजह से इस रंग का इस्तेमाल कार या यात्री को ट्रैफिक लाइट पर रोकने के लिए करना शुरू कर दिया गया था।

पीला रंग शुरू से ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस रंग को ट्रैफिक लाइट में रखने का कारण था कि जब पीली रोशनी हो तो यह संकेत मिले कि आप फुटपाथ को पार करने या वाहन को आगे बढ़ाने या अपनी ऊर्जा का उपयोग करने के लिए तैयार हैं।

हरे रंग को प्रकृति से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में कहा जाता है यह रंग इस बात की तरफ इशारा करता है कि सब कुछ ठीक है। इस वजह से इसे ट्रैफिक लाइट में लाया गया ताकि यह पता चल सके कि अब वाहन को आगे बढ़ने के लिए या पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए चलना चाहिए।