76 विदेशी नागरिकों को मिली जमानत, 10,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर मिली जमानत

 76 विदेशी नागरिकों को मिली जमानत,  10,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर मिली जमानत

 दिल्ली की एक न्यायालय ने बीते मार्च में निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात ( Tablighi Jamaat Nizamuddin Markaz ) के प्रोग्राम में शामिल हुए आठ भिन्न-भिन्न राष्ट्रों के 76 विदेशी नागरिकों को गुरुवार को जमानत

( Delhi court grants bail ) दे दी. दिल्ली स्थित साकेत न्यायालय की मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहन कौर ने इन 76 जमातियों को 10,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर जमानत दे दी.

विदेशी नागरिकों की ओर से पेश एडवोकेट एस हरिहरन ने बताया कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ मलिक ने यह आदेश तब दिया जब मलेशिया के एडवोकेट ने हल्के आरोप लगाकर कम सजा की मांग की थी. हरन के अनुसार, शिकायतकर्ता (लाजपत नगर के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट), लाजपत नगर क्षेत्र के अलावा पुलिस आयुक्त व निज़ामुद्दीन के इंस्पेक्टर ने न्यायालय से बोला कि उन्हें उनकी दलीलों से कोई असहमति नहीं है व तबलीगी जमात ( Nizamuddin Tablighi Jamaat ) के विदेशी नागरिकों को बरी कर दिया गया.

इससे पहले गुरुवार को न्यायालय ने मलेशिया के 60 नागरिकों को सात-सात हजार रुपये जुमार्ना भरने के बाद बरी कर दिया था. याचिका समझौता प्रक्रिया के तहत हल्के आरोप स्वीकार करने के बाद न्यायालय ने इन विदेशियों को मुक्त कर दिया था.

तबलीगी जमात ( Tablighi Jamaat ) से जुड़े इस मुद्दे को लेकर दिल्ली पुलिस की क्राइम शाखा ने 956 विदेशी नागरिकों का नाम लेते हुए 59 चार्जशीट फाइल की थीं. ये सभी जमाती 36 राष्ट्रों से आए थे. हालांकि पुलिस द्वारा इन सभी को अरैस्ट नहीं किया गया है. इस सिलसिले में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद ( Maulana Saad Kandhalvi ) व अन्य के विरूद्ध बीते 31 मार्च को एफआईआर दर्ज की गई थी.

इससे पहले हफ्ते की आरंभ में इसी साकेत न्यायालय ने मलेशिया, चीन, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, फिजी व फिलिपींस के नागरिकों को जमानत दी थी. जमानत पर रिहा किए गए यह सभी जमाती कोरोना वायरस ( Nizamuddin Tablighi Jamaat Coronavirus ) को लेकर पर हिंदुस्तान सरकार द्वारा जारी किए गए वीजा मानदंडों व दिशानिर्देशों के कथित उल्लंघन में निजामुद्दीन मरकज में आयोजित प्रोग्राम का भाग थे.

इन सभी आरोपियों पर आईपीसी, महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत व आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत निषेधात्मक आदेशों के उल्लंघन समेत अन्य कई केस दर्ज किए गए थे.

गौरतलब है कि बीते गुरुवार को केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि गृह सचिव ने सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लेटर लिखकर विदेशी तबलीगी नागरिकों को उनके संबंधित राष्ट्रों को न सौंपे जाने का अनुरोध किया है. केन्द्र ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि गृह सचिव ने बोला है कि विदेशी नागरिक पर्यटक वीजा पर तबलीगी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, उन्हें तुरंत उनके राष्ट्रों में उनकी एकांतवास अवधि समाप्त होने के बाद निर्वासित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके विरूद्ध आपराधिक मुद्दे उपस्थित हैं.

अपने जवाबी हलफनामे में केन्द्र ने बोला कि वीजा की शर्तों के उल्लंघन के अतिरिक्त तबलीगी गतिविधियों में शामिल होकर याचिकाकर्ताओं (विदेशी नागरिकों) ने मौजूदा कोविड-19 के दौरान कई लोगों के ज़िंदगी को खतरे में डाल दिया है. इसलिए वे कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी हैं. न्यायालय ने शुक्रवार को मुद्दे की सुनवाई करेगी.