तीन साल बीत गए, अभी तक वातानुकूलित नहीं हुए स्टेशन प्रबंधकों के दफ्तर

तीन साल बीत गए, अभी तक वातानुकूलित नहीं हुए स्टेशन प्रबंधकों के दफ्तर

अर्ध शहरी क्षेत्रों में पडऩे वाले पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों पर तैनात प्रबंधकों, अधीक्षकों और प्रभारी पर्यवेक्षकों के दफ्तर आज तक वातानुकूलित नहीं हो पाए। जबकि, तीन साल पहले 19 जून 2018 को ही रेलवे बोर्ड ने सभी कार्यालयों को वातानुकूलित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया था। इसको लेकर संबंधित रेलकर्मियों में आक्रोश है। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) ने सोमवार को बैठक कर अपना विरोध जताया है। साथ ही इस प्रकरण को बोर्ड के समक्ष उठाने की चेतावनी देते हुए रेलवे प्रशासन से कार्यालयों को यथाशीघ्र वातानुकूलित कराने की मांग की है।

अपने संबोधन में नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे (एनएफआइआर) के जोनल सेक्रेटरी रमेश मिश्रा ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे में अधिकारियों की उदासीनता के चलते रेलवे बोर्ड के आदेशों का भी अमल नहीं हो रहा। संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने बताया कि गर्मी के दिनों में छोटे स्टेशनों पर तैनात कर्मचारी की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में हरपल संरक्षा प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। संघ के प्रवक्ता एके सिंह ने कहा कि अधिकारियों के दफ्तर में तो प्रत्येक वर्ष एसी बदले जा रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है। इस मौके पर मनोज द्विवेदी और डीके तिवारी आदि पदाधिकारी मौजूद थे। अंत में पदाधिकारियों ने 18 माह से फ्रीज (किसी अवधि विशेष के लिए आय या मूल्य को स्थिर रखना) महंगाई भत्ता की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

जेसीएम की बैठक में भाग लेंगे नरमू के महामंत्री

एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री केएल गुप्त 26 जून को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल कौंसिल आफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसीजेसीएम) की बैठक में भाग लेंगे। एनसीजेसीएम ने उन्हें बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। महामंत्री के अनुसार बैठक में वह आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) और पूर्वोत्तर रेलवे के प्रतिनिधि के रूप में पांच प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे। जिसमें कोरोना काल में स्पेशल लीव, मैनुअल पास, ट्रैक मेंटेनरों को जूता व अन्य सुरक्षा उपकरण तथा रेलवे बोर्ड के आदेशों की अवहेलना शामिल है। इसके पहले 22 जून को रेलवे बोर्ड स्तर पर आयोजित होने वाली डीसीजेसीएम की बैठक में भी वह प्रतिभाग करेंगे।


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।