श्वान के इलाज के लिए 1200 किलोमीटर दूर से आ गई टीम

श्वान के इलाज के लिए 1200 किलोमीटर दूर से आ गई टीम

इंसान हो या जानवर, दर्द सभी को होता है। चोट लगने पर जानवर का भी इलाज होना चाहिए। हम इंसानों को चोट लगने पर क्‍या-क्‍या नहीं करते हैं। इसी तरह की सोच जानवरों के साथ भी रखनी चाहिए, जिससे उनकी तकलीफ और दर्द को दूर किया जा सके। इसी तरह की सोच वाली महाराष्ट्र के चंद्रपुर की एक संस्था के स्वयंसेवक घायल श्वान के इलाज के लिए 1200 किलोमीटर का सफर तय कर कुशीनगर जिले में आ गए। उन्होंने एक श्वान को सरिया मारकर घायल करने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर देखा था। सरिया श्वान के पेट में घुसी हुई है। ये देखने के बाद से ही टीम के सदस्‍य श्‍वान के इलाज के लिए काफी परेशान थी। उस श्‍वान का बेहतर इलाज हो सके, इस‍के लिए टीम वहां से चल दी।

इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ था पडरौना वीडियो

पडरौना का यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। उसे महाराष्ट्र के चंद्रपुर की संस्था 'प्यार रेस्क्यू सेंटर' के अर्पित सिंह ठाकुर और कुणाल महले ने देखा। वीडियो देख श्‍वान के इलाज के लिए वे कुशीनगर पहुंच गए। उन्होंने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष विनय जायसवाल से बातचीत की। साथ ही श्वान की तलाश करने के लिए सहयोग मांगा। सुबह से शुरू हुई तलाश देर रात रात नौ बजे सुभाष चौक पर पूरी हुई।

घायल श्‍वान को एंबुलेंस से लाया गया पशु चिकित्‍सालय

घायल श्वान को नगर पालिका के एंबुलेंस से पशु चिकित्सालय लाया गया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। अर्पित सिंह ठाकुर और कुणाल महले ने बताया कि श्वान का आपरेशन करना पड़ सकता है। यहां आपरेशन संभव नहीं हुआ तो वे श्वान को दिल्ली ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि बेसहारा पशुओं की देखभाल करने वाली यह संस्था चंद्रपुर के डा. देवेंद्र रापेली चलाते हैैं। अब तक कई पशुओं की देखभाल कर उनका इलाज किया जा चुका है।


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।