समाजवादी पार्टी अपने पदाधिकारियों की भारी-भरकम टीम का करेगी ऐलान

समाजवादी पार्टी अपने पदाधिकारियों की भारी-भरकम टीम का करेगी ऐलान

लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) में उम्मीद के हिसाब से सीटें न जीत पाने के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने अपने तमाम संगठनों को खत्म कर दिया था। पूरी समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद को छोड़ कर सभी फ्रंटल विंग्स, जिला अध्यक्ष, महानगर अध्यक्षों की टीम को भी खत्म कर दिया गया था।

 यही नहीं टीवी पैनलिस्ट की भारी-भरकम टीम को भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तत्काल असर से खत्म कर दिया था। महीनों के इंतजार के बाद अब समाजवादी पार्टी का खेमा इस बात के लिए तैयार नजर आ रहा है कि धीरे-धीरे ही ठीक लेकिन खत्म किए गए तमाम संगठनों को बहाल किया जाए। समाचार है कि समाजवादी पार्टी ने अंदर खाने तमाम पदाधिकारियों की टीमों के नामों का चयन कर लिया है। शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद समाजवादी पार्टी अपने पदाधिकारियों की भारी-भरकम टीम का ऐलान कर देगी।

बता दें समाजवादी पार्टी पिछले कुछ दिनों से अपना कार्य निवर्तमान सपा जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्षों व पदाधिकारियों के सहारे चला रही थी। पिछले दिनों 15 जिला/महानगर अध्यक्षों के नामों का ऐलान भी हुआ था लेकिन अभी भी 60 जिलों व कई महानगरों में नए पदाधिकारियों के नामों का ऐलान बाकी है। इन तमाम कवायदों के बीच में टीवी चैनल में समजवादी पार्टी का पक्ष रखने वाले मीडिया पैनलिस्ट के नामों का ऐलान भी होना है। समाजवादी पार्टी में मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी के पद को छोड़कर मीडिया पैनल से जुड़े हुए सभी पदाधिकारियों को टीवी डिबेट में भाग न लेने के आदेश दिए गए हैं।

महीनों से पदाधिकारियों को नयी जिम्मेदारी की है उम्मीद

महीनों से पदाधिकारियों को इस बात की उम्मीद है कि जल्द ही पार्टी उनको नयी जिम्मेदारी सौंपेगी। अब जबकि यूपी में सबसे बड़ा चुनाव 2022 में विधानसभा का होना है। समाजवादी पार्टी यूपी में प्रमुख विपक्षी दल भी है। ऐसे में सपा को भी ये बात पता है कि चीजों को बेहतर करने के लिए जमीन पर कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों में नया जोश भरना होगा।

हालांकि पॉलिटिक्स के जानकार व यूपी की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले लोगों को लग रहा होगा समाजवादी पार्टी अपने निर्णय बहुत धीमी गति से ले रही है लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 3 महीनों में समाजवादी पार्टी ने युद्ध स्तर पर न सिर्फ संगठनों की समीक्षा की है बल्कि इस बात को भी जाने की प्रयास की है कि आखिर 2022 की विधानसभा की जंग को कैसे बेहतर ढंग से लड़ा जा सकता है? सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से तमाम पदाधिकारियों को टुकड़ों में बुलाकर न सिर्फ क्षेत्रवार सीटों की समीक्षा मीटिंग की है बल्कि उन्होंने इस बात को भी तय किया है कि आखिर कहां व किस सीट पर कौन सा आदमी फिट बैठेगा? ये डाटा भी तैयार किया गया है।

संसद के शीतकालीन सत्र के बाद जारी होगी पदाधिकारियों की भारी-भरकम लिस्ट

2019 का लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी ने हालांकि बसपा के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन उम्मीद के हिसाब से रिजल्ट न आने की वजह से अब दोनों पार्टियों के रास्ते अलग हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई मौके पर बोला है कि वह 2022 का विधानसभा चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी अब बिना देर किए 12 दिसंबर 2019 तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के बाद अपने पदाधिकारियों की भारी-भरकम बहुप्रतीक्षित लिस्ट जारी कर देगी।

क्षेत्रीयता, जातिगत आंकड़े व चुनाव जिताऊ का रखा जाएगा ख्याल

संसद के शीतकालीन सत्र के बाद जारी होने वाली लिस्ट में न सिर्फ क्षेत्रीयता का ध्यान रखा जाएगा बल्कि जातिगत आंकड़ों को भी सबसे ऊपर रखा जाएगा। समाजवादी पार्टी नए बनने वाले पदाधिकारियों के पीछे इस बात का भी ख्याल रख रही है कि जिन लोगों को चुनाव लड़ना है आखिर उनको ये पदाधिकारी किस तरह से व कितना मदद कर पाएंगे?

पिछले कुछ दिनों के दशा को अगर देखें तो भारी तादाद में बसपा के कई बड़े फायर बिग्रेड नेताओं ने भी समाजवादी पार्टी ज्वाइन की है। सपा सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर अमल करते हुए बहुप्रतीक्षित पदाधिकारियों की लिस्ट में बीएसपी से आये हुए फायर बिग्रेड नेताओ को भी फिट करने की प्रयास कर रही है।