यूपी को मिली देश की पहली AC Economy Coach की सौगात

यूपी को मिली देश की पहली AC Economy Coach की सौगात

देश के पहली एसी इकोनॉमी क्लास की बोगी यूपी और महाराष्ट्र की ट्रेनों में लगेंगी।।कई चरणों के ट्रायल और रेल संरक्षा आयुक्त की अनुमति के बाद रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने 15 एसी इकोनॉमी बोगियों वाले पहले रैक को यहां से रवाना कर दिया। इनमें करीब 10बोगियां प्रयागराज, आगरा और झांसी रेल मंडल वाले उत्तर मध्य रेलवे जोनल को सौपी गई है। जबकि शेष पांच बोगियां मुम्बई मुख्यालय वाले पश्चिमी रेल को भेजी गई हैं।।जल्द ही यूपी की ट्रेनों में इन बोगियों के इस्तेमाल से जहाँ वेटिंग लिस्ट के यात्रियो को कन्फर्म सीट मिलेंगी। वही दूसरी ओर रेलवे को कम लागत पड़ने से किराए में भी कमी संभव हो सकेगी।

देश मे अभी लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) तकनीक की बोगियों की एसी थर्ड में 72 और पुरानी कन्वेंशनल बोगी में 64 सीट होती हैं। अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) ने एलएचबी की 83 सीटों वाली बोगी को डिज़ाइन किया था। रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने केवल तीन महीने में 10 फरवरी को इसका प्रोटोटाइप तैयार किया था। आरडीएसओ ने दक्षिण रेलवेऔर फिर राजस्थान के कोटा रेल मंडल में 180 किमी प्रतिघंटा की गति से मार्च में इसका ट्रायल किया।।ट्रायल सफल होने पर बोगी को दिल्ली भेजा गया । जहाँ रेल संरक्षा आयुक्त ने भी इसके मानकों को परखा। आयुक्त की क्लियरेंस मिलने पर फैक्ट्री ने पहले रैक का निर्माण शुरू क़िया।

यह है खासियत

सोमवार को कोच फैक्ट्री कपूरथला के जीएम रविन्द्र गुप्ता व प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर आरके मंगला ने जिस थ्री टियर एसी इकोनामी क्लास के 15 डिब्बों को रवाना किया I उन डिब्बों को विभिन्न मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में लगाया जाएगा I प्रत्येक कोच में दिव्यांग लोगों की सुगमता के हिसाब से शौचालय का दरवाजा तैयार किया गया है I

डिजाइन में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के सुधार किए गए हैं जिनमें दोनों तरफ की सीटों पर फोल्डिंग टेबल और बॉटल होल्डर, मोबाइल फोन तथा मैग्जीन होल्डर्स भी उपलब्ध कराए गए हैं । हर बर्थ के लिए पढ़ने के रीडिंग लाइट और मोबाइल चार्जिग प्वाइंट भी लगाए गए हैं। मिडिल और अपर बर्थ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी का डिजायन बदला गया है। इससे यह देखने में भी सुंदर लगे और यात्रियों को असुविधा भी नहीं होगी।


जीएम रवींद्र गुप्ता ने कहा की ‘दुनिया का सबसे सस्ता और सबसे बेहतरीन एसी यात्रा' प्रदान करने वाला एसी इकॉनमी क्लास कोच आरसीएफ की गौरवमयी यात्रा में एक सुनहरा पड़ाव है I बताया कि पचास प्रतिशत स्टाफ से प्रोडक्शन का काम चलाना पड़ा, वहीँ देश के अधिकतर हिस्सों में लॉक डाउन के कारण सामान की आपूर्ति न होने से आर सी एफ का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ I इसके बावजूद भी आरसीएफ प्रशासन और कर्मचारियों ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए मई महीने में 100 से अधिक बोगियों का निर्माण कियाI 


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।