गोरखपुर में फेरी लगाकर बेचते थे स्मैक, पुलिस ने पकड़ा, जानें

गोरखपुर में फेरी लगाकर बेचते थे स्मैक, पुलिस ने पकड़ा, जानें

कैंट पुलिस ने 18 ग्राम स्मैक के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपित फेरी लगाकर मोहल्ले में स्मैत बेचते थे। कपड़े की गठरी साथ में होने की वजह से पुलिस संदेह नहीं करती थी।

कैंट पुलिस को सूचना मिली की फर्रुखाबाद और कुशीनगर जिले के रहने वाले बदमाश फेरी लगाकर स्मैक बेचते हैं। किसी को संदेह न इसके लिए अपने पास कपड़े की गठरी लेकर चलते है, जिसके अंदर स्मैत को छिपाते हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ऐसे फेरी वालों की तलाश में लग गई। प्रभारी निरीक्षक कैंट सुधीर सिंह रेलवे स्टेशन के पास तीन युवकों को गिरफ्तार किया।तलाशी लेने पर उनके पास 18 ग्राम स्मैक मिला। आरोपितों की पहचान फर्रुखाबाद के मीरापुर, ब्रह्मपुरी निवासी धर्मेन्द्र उर्फ ध्रुव सिंह, हीरा सिंह और कुशीनगर जिले के पडऱौना शिवाला मंदिर निवासी लल्लन प्रसाद मद्धेशिया के रूप में हुई। एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज कर दोपहर बाद कैंट पुलिस ने आरोपितों को कोर्ट में पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया।

बरात में चोरी

चौरीचौरा इलाके के रामपुर रकबा निवासी राजेंद्र की बाइक रात में चोरी हो गई। रात में वह लक्ष्मनपुर गांव में बरात गए थे। उन्होंने अपनी बाइक विवाह स्थल से थोड़ी दूरी पर खड़ी की थी। कुछ देर बाद समारोह से घर जाने के लिए निकले तो बाइक वहां से गायब हो गई थी। इस संबंध में उन्होंने तहरीर दे दी है। वहीं झंगहा क्षेत्र के राघोपट्टी पडऱी निवासी ओमप्रकाश राजभर की बेटी दुर्गावती को रविवार की रात जहरीले सांप ने डंस लिया था। परिवार के लोग उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ब्रह्मपुर ले गए, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भी परिवार के लोग झाडफ़ूंक कराने में जुटे हैं।

बुजुर्ग का शव मिला

हरपुर बुदहट इलाके के कटाई टीकर गांव के प्राथमिक विद्यालय में एक बुजुर्ग का शव मिला है। उनकी पहचान नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक सप्ताह से बुजुर्ग को गांव में इधर-उधर भटकते देखा जा रहा था। पुलिस ने कहा है कि शव की शिनाख्त कराने की कोशिश की जा रही है।


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।