रोबोट-ड्रोन जैसे यंत्र बनाना सीख जुड़े रोजगार से, राजकीय इंजीनियरिंग कालेज अंबेडकरनगर देगा न‍िश्‍शुल्‍क प्रश‍िक्षण

रोबोट-ड्रोन जैसे यंत्र बनाना सीख जुड़े रोजगार से, राजकीय इंजीनियरिंग कालेज अंबेडकरनगर देगा न‍िश्‍शुल्‍क प्रश‍िक्षण

 राजकीय इंजीनियरिंग कालेज ने उन सभी छात्र-छात्राओं को रोबोट और ड्रोन जैसा अत्याधुनिक यंत्र बनाने की कला सीखने का सुनहरा मौका दिया है, जो इसमें रुचि रखते हैं लेकिन, इस विधा की पढ़ाई करने से वंचित रह गए। उन्हें यहां प्रयोगशाला में मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसे पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र भी मिलेगा। खास बात यह कि किसी भी स्कूल, कालेज या विश्वविद्यालय में अध्ययनरत या पढ़ाई पूरी कर चुका छात्र यह प्रशिक्षण हासिल कर सकता है, इसमें विशेष शैक्षणिक योग्यता या उम्र का भी कोई बंधन नहीं रखा गया है। इसके लिए संस्थान में इनोवेशन एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेल (आइईडीसी) की स्थापना की गई है।

संस्थान के निदेशक प्रो. संदीप तिवारी ने बताया कि छात्रों को सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए उनकी कौशल क्षमता निखारने को यह प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां वैज्ञानिक अभिरुचि रखने वाला कोई भी युवा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लेकर सोलर पैनल, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, मोबाइल एप, ड्रोन, रोबोट, पीसीबी बोर्ड और बड़े-बड़े पुल बनाने के लिए व्यवहारिक दक्षता हासिल कर सकता है। प्रशिक्षण लेने की शर्तों को भी काफी लचीला रखा गया है। निदेशक प्रो. संदीप तिवारी के मुताबिक यदि कोई छात्र नियमित नहीं आ सकता तो वह अपनी सुविधानुसार सप्ताह में एक या दो दिन भी प्रशिक्षण ले सकता है। अपनी विधा में पूरी तरह पारंगत होते ही उसे प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा। रजिस्ट्रेशन से लेकर प्रशिक्षण तक सब पूरी तरह मुफ्त रहेगा। उन्होंने बताया कि इन युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए इंजीनियरिंग कालेज के विभिन्न फैकल्टी के उच्च कोटि के शिक्षकों का पैनल बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर बाहर से भी शिक्षकों को बुलाया जाएगा।

कई संस्थानों और उद्योगपतियों ने मदद को बढ़ाए हाथ: राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के शिक्षक डाक्टर सुधाकर त्रिपाठी ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए जरूरी साजो-सामान जुटाने को कई शिक्षण संस्थाओं के साथ कुछ उद्योगपतियों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अपने आप में इस अनूठे प्रयोग की शुरुआत के लिए आयोजित वेबिनार में शामिल प्राविधिक एवं वोकेशनल शिक्षा के सचिव आलोक कुमार, एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि. के कुलपति विनय कुमार पाठक, झारखंड तकनीकी विवि. के कुलपति पीके मिश्र ने इक्विपमेंट के साथ उच्च प्रशिक्षित फैकल्टी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, उद्योगपति सुशील अग्रवाल ने कच्चे माल खरीदने में आने वाला सारा खर्च उठाने का संकल्प लिया है। 


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।