उमर गौतम की गिरफ्तारी पर रिश्तेदारों ने दी प्रतिक्रिया, कहा...

उमर गौतम की गिरफ्तारी पर रिश्तेदारों ने दी प्रतिक्रिया, कहा...

मतांतरण के मामले में एटीएस द्वारा गिरफ्तार मोहम्मद उमर गौतम के बारे में फतेहपुर स्थित उसके गांव में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। ग्रामीणजनों का कहना है कि श्याम के इस्लाम कुबूल करने का आभास तो हमें था, लेकिन वह इतने खतरनाक काम में लगा होगा इसका अंदाजा नहीं था। गांव के एक पड़ोसी ने बताया कि डेढ़ साल पहले वह फतेहपुर शहर के एक स्कूल संचालक मौलाना के साथ गांव दस मिनट के लिए आया था। यह भी पता चला कि वह तकरीर आदि के कार्यक्रमों में फतेहपुर, खागा, बांदा आदि जनपदों में जाता था। वहीं गांव में दो दिन से लगातार पुलिस टीम की आवाजाही और तहकीकात भी जारी है। इस बीच जागरण डॉट कॉम की टीम ने उमर (मतांतरण से पहले श्याम प्रताप सिंह) के स्वजन से बातचीत की। जानिए मामले पर उमर के स्वजन ने क्या प्रतिक्रिया दी:

भाई कहने में आती है शर्म: श्याम उर्फ उमर के बड़े भाई उदयभान सिंह जो शहर के गाजीपुर बस स्टाप के पास रहते हैं, श्याम का नाम सुनते ही बिफर पड़ते हैं। उनका कहना था कि ऐसे पापी से हमारा रिश्ता बीस साल पहले ही खत्म हो गया था। मैं वर्ष 1980 से गांव छोड़कर शहर में रह रहा हूं। कहा कि एक मां की कोख से पैदा हुए हैं तो यह सब सुनकर दर्द तो होता है, लेकिन उसने ऐसा घृणित कार्य किया है कि भाई कहने में शर्म आती है।

पैतृक रिश्तों से बन गईं दूरियां: वर्ष 1984 में मो. उमर बन जाने के बाद श्याम प्रताप के रिश्तों की डोर कमजोर होने लगी थी। स्वजन की मानें तो मतांतरण की जानकारी होने के बाद रिश्तेदारों ने दूरियां बना ली थीं। जहां तमाम मांगलिक कार्यों मे उसे न्योता तक नहीं दिया जाता रहा था जबकि अन्य हिस्सा बनते थे। एटीएस के खुलासे के बाद रिश्तेदार चुप्पी साधे हुए हैं।

रिश्तेदारों के मोबाइल फोन स्विच आफ हुए: मामला उजागर होने के बाद इस बड़े परिवार के रिश्तेदार और नातेदार कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे। बार-बार फोन आने से कुछ ने कहा कि उस पापी से हमारा कोई रिश्ता नहीं। वहीं तमाम करीबियों ने अपने मोबाइल स्विच आफ कर लिए। जिससे बात हुई वह भी कुछ बताने से कतराता रहा। हालांकि जिनसे भी बात उनमें एक सामान्य रही कि सभी नाता तोड़ लेने की दुहाई देते रहे।

उमर का किससे था संपर्क, ब्योरा जुटा रही पुलिस: थरियांव थाने के रमवां पंथुआ गांव में श्याम प्रताप उर्फ मो. उमर के एटीएस की ओर से मतांतरण के आरोप में पकड़े जाने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासनिक अफसरों में खलबली मची रही। एटीएस टीम आने की आशंका पर पुलिस टीम की गाड़ियां गांव में दौड़ती रहीं। देर रात तक पुलिस उमर के चचेरे भाई से ब्योरा संकलित करने में जुटी रही। सीओ थरियांव अनिल कुमार व इंस्पेक्टर एसओ नंदलाल सिंह पीआरवी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। 

वर्ष 1980 से श्याम प्रताप उर्फ मो. उमर का स्वजन से कोई मतलब नहीं था। पिता की मौत पर ये गांव आया था, लेकिन कुछ देर बाद चला गया था। शहर में वह कहां कहां आता-जाता था और इसके किससे -किससे संपर्क थे, इसकी जांच कराई जा रही है। -  सतपाल अंतिल, पुलिस अधीक्षक
मतांतरण करने वाला श्यामप्रताप उर्फ मो. उमर का स्वजन के बीच मेलजोल है कि नहीं। वह गांव आता है कि नहीं, इसी बारे में जांच की जा रही है। 


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।