सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने की तैयारी तेज, भर्ती आयोग व बोर्ड अध्यक्षों की क्लास लेंगे सीएम योगी

सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने की तैयारी तेज, भर्ती आयोग व बोर्ड अध्यक्षों की क्लास लेंगे सीएम योगी

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद उत्तर प्रदेश में अनलाक होते ही विभिन्न सरकारी विभागों में भर्तियों को रफ्तार पकड़ाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी भर्ती आयोगों और बोर्ड अध्यक्षों की क्लास लेंगे। निर्देश है कि उनकी जल्द बैठक बुलाई जाए। ये बैठक इसी माह होने की उम्मीद है। उनसे अब तक कितनी भर्तियां पूरी की हैं और अभी कितनी लंबित हैं जैसे सवाल भी पूछे जाएंगे? साथ ही उन्हें यह भी बताना होगा कि लंबित भर्तियों को पूरा करने का रोडमैप क्या है? तैयारी है कि सभी विभागों में रिक्त पदों को युद्धस्तर पर भर दिया जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार रोजगार के मुद्दे पर बेहद गंभीर है। चार साल में चार लाख युवाओं को रोजगार दिया गया है। इधर, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से सबकुछ ठप रहा तो उसका असर भर्तियों पर भी पड़ा है। आयोगों व बोर्डों को अपनी परीक्षाएं टालनी पड़ी और साक्षात्कार तक नहीं हो सके। यह भी सही है कि कई आयोग व बोर्ड सरकार की मंशा पर खरे नहीं उतर सके हैं, मसलन वे नई भर्तियां निकालने व पुरानी भर्ती को पूरा करने में तत्पर नहीं दिखे जिससे समय-समय पर प्रतियोगियों ने गुस्सा सरकार पर उतारा है। इससे शासन अवगत है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस निगाह रखे हैं। अब अनलाक होने पर मुख्यमंत्री ने शासन के अफसरों को निर्देश दिया है कि वे सभी आयोगों व बोर्ड अध्यक्षों की बैठक बुलाए जिसमें भर्तियां तेज किया जा सके।

सभी विभागों में रिक्त पदों को भर दिया जाए : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा है कि सभी विभागों में रिक्त पदों को भर दिया जाए। इसकी प्रक्रिया तीन माह में शुरू करके हर हाल में छह माह में पूरा किया जाए। असल में, योगी सरकार विधानसभा चुनाव में रोजगार के मोर्चे पर उपलब्धियों के साथ उतरना चाहती है। चार साल में चार लाख रोजगार को अगले छह माह में तेज करके पांच साल में पांच लाख करने की है। इसके लिए आयोग व बोर्ड अध्यक्षों को कठिन सवालों से दो-चार होना पड़ सकता है, क्योंकि कई बोर्ड नई भर्तियों की जगह पुरानी भर्तियां ही पूरा नहीं कर सके हैं।

एक साल के भीतर दूसरी बार की पहल : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भर्ती आयोगों व बोर्ड अध्यक्षों से एक साल के भीतर दूसरी बार मिलने वाले हैं। ज्ञात हो कि सितंबर 2020 में सीएम के निर्देश पर विशेष सचिव कार्मिक ने सभी आयोगों, बोर्ड अध्यक्षों व भर्तियों में अहम भूमिका निभाने वाले अफसरों को तलब किया था।


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।