न्यायमूर्ति एमएन भंडारी इलाहाबाद हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

न्यायमूर्ति एमएन भंडारी इलाहाबाद हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

 इलाहाबाद हाई कोर्ट वरिष्ठ न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ (एमएन) भंडारी को मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय यादव के अवकाश ग्रहण करने के बाद 26 जून से अपना कार्यभार संभालेंगे।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय यादव ने बीती 12 जून को शपथ ली थी। अब उनका स्थान लेने वाले न्यायमूर्ति भंडारी का जन्म 12 सितंबर 1960 को हुआ है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ (एमएन) भंडारी पांच जुलाई 2007 को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। इसके बाद 15 मार्च 19 को जयपुर से तबादला होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट आये। उनका कार्यकाल करीब 14 महीने का रहेगा। वह 12 सितंबर 2022 को सेवानिवृत्त होंगे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी की नियुक्ति की है। इलाहबाद हाई कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी 26 जून को इलाहबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ (एमएन) भंडारी ने जोधपुर और जयपुर में राजस्थान हाई कोर्ट के साथ ही केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण जयपुर के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत की है। सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने संवैधानिक, सिविल, सेवा, श्रम, आपराधिक और मध्यस्थता मामलों में वकालत की। वह संवैधानिक, सेवा, श्रम और मध्यस्थता मामलों में विशेषज्ञ माने जाते हैं। न्यायमूर्ति भंडारी रेलवे के साथ ही राजस्थान सड़क परिवहन निगम, परमाणु ऊर्जा निगम, राजस्थान राज्य चुनाव आयोग, राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान की सरकारी बिजली कंपनियां, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर नगर निगम, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, गंगा नगर शुगर मिल्स लिमिटेड तथा राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को भी स्थाई वकील के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।  


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।