देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन देहरादून में प्रारम्भ 

देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन देहरादून में प्रारम्भ 

देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन देहरादून में प्रारम्भ हो गया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन का उदघाटन किया. इससे पहले ओम बिरला को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

देहरादून में आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर कुमाऊं के छोलिया नृत्य की प्रस्तुति के बीच पारम्परिक तरीका से तिलक कर अथितियों का किया गया स्वागत. इस मौके पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित रहे.

उत्तराखंड में पहली बार हो रहे इस आयोजन में संविधान की दसवीं अनुसूची व अध्यक्ष की भूमिका, संसदीय लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा होनी है. इस मौके पर प्रदेश विधानमंडलों के कार्यकरण व वित्तीय स्वायत्तता को लेकर पूर्व में गठित तीन समितियां अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेंगी.

देहरादून में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति के अतिरिक्त 17 विधानसभा अध्यक्ष, 12 उपाध्यक्ष, विधान परिषदों के पांच सभापति, एक उपसभापति व विधानमंडलों के 21 सचिव शिरकत कर रहे हैं. सम्मेलन में प्रदेश विधानमंडलों के पीठासीन ऑफिसर अपने अनुभव साझा करेंगे.

उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न सत्रों में संविधान की दसवीं अनुसूची व अध्यक्ष की किरदार पर चर्चा होगी. हालांकि, दसवीं अनुसूची में दल बदलाव के आधार पर संसद या प्रदेश विधानमंडलों की सदस्यता की निरर्हता के बारे में उपबंध किए गए हैं. निरर्हता के विषय में सभापति और अध्यक्ष का फैसला अंतिम होता है. इनमें व क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर मंथन होगा.

चर्चा का एक अन्य विषय शून्यकाल सहित सभा के अन्य साधनों के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण व क्षमता निर्माण है. यद्यपि विधानमंडलों के सदस्यों के पास कानून बनाने व कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने की शक्ति होती है. इनका इस्तेमाल संसदीय प्रक्रिया और नियमों के गुलाम किया जाता है, लेकिन शून्यकाल में मेम्बर ऐसे मुद्दे उठा सकते हैं, जिन्हें वे अविलंबनीय लोक महत्व का मानते हैं. इन्हें सामान्य प्रक्रिया नियमों के भीतर उठाने में होने वाले विलंब से वे बचना चाहते हैं.

सम्मेलन में तीन समितियों की रिपोर्ट भी पेश होगी. असोम विस के अध्यक्ष हितेंद्रनाथ 'विधानमंडलों के कार्यकरण में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का मूल्यांकन', उप्र के विस अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित 'सभा के सुचारू कार्यकरण सबंधी मामलों' व राजस्थान के विस अध्यक्ष सीपी जोशी 'विधानमंडल सचिवालयों की वित्तीय स्वायत्तता की जांच' पर अपनी रिपोर्ट रखेंगे.