श्रावस्ती में च‍िलच‍िलाती धूप में बैंक के सामने लेटा वृद्ध, अपने पैसों के ल‍िए आठ माह से लगा रहा था चक्‍कर

श्रावस्ती में च‍िलच‍िलाती धूप में बैंक के सामने लेटा वृद्ध, अपने पैसों के ल‍िए आठ माह से लगा रहा था चक्‍कर

 मंगलवार को चिलचिलाती धूप के बीच सिरसिया स्थिति इंडियन बैंक के सामने सड़क पर लेट कर वृद्ध बैंक से अपना पैसा दिलाने के लिए गुहार लगाने लगा। देखते ही देखते मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। सड़क पर आवागमन बाधित हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद बैंक से पैसा मिला तो हंसी-खुशी वृद्ध अपने घर लौट गया।

खपरीपुर निवासी रामप्रघट इंडियन बैंक शाखा सिरसिया में जमा अपना पैसा निकालने के लिए आठ माह से बैंक का चक्कर लगा रहे थे। बैंक कर्मी खाते में नाम गलत होना बता कर उन्हें पास लौटा देते थे। मंगलवार को एक बार फिर बैंक से उन्हें वापस किया गया तो वृद्ध बैंक के सामने सिरसिया-तुलसीपुर मार्ग पर सड़क के बीच में जाकर लेट गया। चिलचिलाती धूप में सड़क पर लेटे वृद्ध ने बैंक से अपने पैसे दिलाने के लिए गुहार लगाना शुरू कर दिया। वृद्ध का कहना था कि आठ माह से बैंक का चक्कर काटते-काटते चप्पल घिस गई है।

यहां कोई सुनने वाला नहीं है। वृद्ध की पीड़ा सुन मौके पर मौजूद लोग भावुक हो गए। सड़क पर भीड़ बड़ी तो वाहनों का आवागमन भी थम गया। इससे दोनों ओर जाम लगने लगा। प्रभारी निरीक्षक राम समुझ प्रभाकर पुलिस टीम के साथ पहुंचे। धूप से उठाकर वृद्ध को छांव में ले गए और उनकी समस्या जानी। प्रभारी निरीक्षक ने बैंक शाखा प्रबंधक से बात की तो पता चला कि खाते में नाम गलत हो गया है। वृद्ध से दस्तावेज लेकर नाम का मिलान कराया गया। इसके बाद उसके 15 हजार 291 रुपये का भुगतान कर दिया गया। पैसे मिले तो वृद्ध के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।