लखनऊ में स्‍कूल का अवैध न‍िर्माण प्रशासन ने ढहाया, अराजकता से परेशान थे कालाकाकर कॉलोनी न‍िवासी

लखनऊ में स्‍कूल का अवैध न‍िर्माण प्रशासन ने ढहाया, अराजकता से परेशान थे कालाकाकर कॉलोनी न‍िवासी

न्यू हैदराबाद काला काकर कॉलोनी में नाली के ऊपर बने स्कूल को रविवार सुबह से थोड़ा जा रहा है भारी मात्रा में पुलिस बल को बुलाया गया है। इसमें सैकड़ों नगर निगम कर्मचारियों को लगाया गया है। नगर निगम स्कूल के उसी हिस्से को तोड़ा है। इसमें अवैध निर्माण था। यह निर्माण नाले के ऊपर बनाया गया था। नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी खुद मौके पर मौजूद हैं। महिला पुलिस बल को भी तैनात किया गया है। अधिकारी बताते हैं कि स्कूल प्रबंधन को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है इसके बाद नगर निगम ने उसे तोड़ने का निर्णय लिया।

यह है मामला : न्यू हैदरबाद में नाले के ऊपर बने यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल और अन्य 121 अवैध निर्माण को तोड़ने की मांग कॉलोनी निवासी लंबे समय से कर रहे थे। कॉलोनी के निवासी नाले के ऊपर बने स्कूल और अन्य अवैध निर्माण से इतना अधिक परेशान हो गए थे। उन्होंने मकान बेचने की सूचना चस्पा कर दी थी । इसके बाद नगर निगम ने अवैध कब्जा करने वालों को नोटिस जारी की थी। इसमें यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल भी शामिल था।

नगर निगम की नोटिस मिलने के बाद स्कूल संचालिका ने भी सफाई दी थी लेकिन, नगर निगम ने प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था।  यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल संचालक को चार जून को नोटिस देते हुए कहा गया था कि एक सप्ताह में अवैध निर्माण हटा लेें। इस नोटिस पर स्कूल संचालिका ने जवाब दिया और नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी और कोर्ट में मामला लंबित होने का तर्क दिया था।

नगर निगम का कहना था नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 296 के अंतर्गत बिना नोटिस के किसी भी तरह का अतिक्रमण हटा सकता है।  स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका की थी, लेकिन कोर्ट से कोई उन्हें राहत नहीं मिली। दरअसल यहां के निवासी नाले के ऊपर रहने वाले लोगों की अराजकता से परेशान हो गए थे। घरों के सामने लोग शराब पीते थे और गाली गलौज करते थे। 27 मई को एक धार्मिक आयोजन को लेकर दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे और बवाल होने की आशंका बढ़ गई थी। मौके पर पीएसी को बुलाना पड़ा था यहां के निवासियों का कहना है अगर दो समुदाय के बीच संघर्ष हो जाता उन लोगों क्या होता। 


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।