फतेहपुर का 'श्याम' उत्तराखंड में कैसे बना 'उमर', यहां जानिए- पूरी प्रोफाइल

फतेहपुर का 'श्याम' उत्तराखंड में कैसे बना 'उमर', यहां जानिए- पूरी प्रोफाइल

उत्तर प्रदेश में मतांतरण का बड़ा मामला सामने आने के बाद एटीएस टीम पूरी तरह से सतर्क है। हजार से अधिक लोगों को मुस्लिम बनाने के घिनौने कृत्य में शामिल दो लोगों को टीम ने गिरफ्तार कर केस दर्ज किया है। सबसे चौंका देने वाली बात तो यह है कि मतांतरण के खेल की फंडिंग कुख्यात संगठन आइएसआइ से हाेती थी। बता दें कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों में एक शख्स माे. उमर गौतम फतेहपुर का निवासी है, जिसका नाम कभी श्याम प्रताप हुआ करता था। इस खबर में हम आपको श्याम के उमर बनने तक के सफर के बारे में बताएंगे :

कौन है मो. उमर: दिल्ली के डासना मंदिर में पुजारी पर हुए हमले के बाद पकड़ा गया मो. उमर जिले के थरियांव थाने के रमवां पंथुआ गांव का निवासी है। उसने कक्षा एक से आठ तक की शिक्षा रमवां परिषदीय स्कूल से ली और कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई सर्वोदय इंटर कालेज गोपालगंज से पूरी की थी।

पढ़ाई-लिखाई में होशियार होने पर पिता ने उसको बीएससी एजी की पढ़ाई के लिए जीबी पंत कृषि प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड भेजा। बीएससी करने के बाद वर्ष 1982 में जब वह गांव लौटा तो किसी से ये नहीं बताया कि उसने मुस्लिम मत अपना लिया है। इसके बाद शादी जिले के ही गाजीपुर थानाक्षेत्र के खेसहन गांव में क्षत्रिय परिवार में कर ली और पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया, लेकिन मुस्लिम धर्म नहीं छोड़ा। बताते तो यह भी हैं कि हसवा, बिलंदा, हथगाम और सुल्तानपुर घोष के कुछ मदरसों व गांवों में इसका आना जाना अभी तक जारी था। 

उत्तराखंड में कुबूल किया इस्लाम: श्याम प्रताप सिंह जब जीबी पंत विश्व विद्यालय में पढ़ाई करने गया था तो वहीं पर इस्लाम धर्म कुबूल किया था। उस समय ताहिर नामक एक दोस्त ने इसे मुस्लिम लड़की से शादी करने पर अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रवक्ता पद नौकरी दिलाने का लालच भी दिया था। 

जामिया मिलिया इस्लामिया से किया था एमए: स्वजन की मानें तो पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय से बीएससी करने के बाद दिल्ली में परास्नातक के लिए दिल्ली जा पहुंचा। यहां पर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। वहीं से इस्लामिक स्टडीज में एमए किया और बताया जाता है कि अच्छे अंक से परीक्षा उत्तीर्ण करने के चलते उसे लेक्चरर की नौकरी मिल गयी थी। नौकरी में रहते हुए वह शैक्षिक गतिविधियों और मुस्लिम धर्म के कार्यक्रमों में शिरकत करता था। 1982 में उसने मतांतरण खुद किया और परिवार सहित समाज में इस काम को अंजाम दिया।

पिता ने कर दिया था बेदखल: पिता धनराज सिंह को वर्ष 1984 में किसी के माध्यम से जानकारी हुई कि वह मुस्लिम बनकर नई दिल्ली में के-47 बाटला हाउस जामिया नगर में रह रहा है। उसकी फोटो भी आई। इसमें वह मौलाना की तरह दिख रहा था। इसके बाद पिता ने अन्य पांच बेटों से सलाह कर उसको परिवार से बेदखल कर दिया। भाई उदय ने बताया कि मां की मौत पर 10 साल पहले वह गांव आया था तो पिता ने डांटकर उसे भगा दिया था।  

पत्नी व बच्चों के मुस्लिम नाम रख लिए: श्याम ने राजेश कुमारी से शादी करने के बाद दिल्ली जाकर पत्नी का नाम रजिया, बेटी का नाम तकदीश फातिमा व बेटे का नाम आदिल उमर गौतम रख लिया था। चर्चा है कि उसने दिल्ली में एक और शादी भी की है।  

75 बीघा खेत में 12 बीघे का काश्तकार: पारिवारिक चचेरे भाई राजू सिंह ने बताया कि श्याम छह भाइयों में चौथे नंबर का है। इन सभी के हिस्से में 12-12 बीघा खेत हैं। सभी भाई बाहर रहते हैं। सभी के हिस्से के मकान में ताला लगा रहता है। श्याम से कोई मतलब नहीं रखता है।  

ग्रामीणों के सवाल करने पर दिया था यह जवाब: एडीओ पंचायत पद से सेवानिवृत्त हुए पिता धनराज सिंह की मौत पर वह गांव आया था। यहां उसे मुस्लिम वेश में देख पड़ोसियों ने पूछा था, अरे यह सब कैसे? तब उसने बस यही कहा था कि जो हो गया, वही सही है और वह इसी में खुश है। गांव वालों व स्वजन से पिता की मौत कैसे हुई, तेरहवीं संस्कार हुआ या नहीं की जानकारी लेकर चला गया। ग्रामीणों ने बताया कि श्याम प्रताप के मुस्लिम मत अपनाने की सुगबुगाहट तो लोगों को थी, लेकिन वह इस तरह से मतांतरण कराने के मिशन में लगा है, ये नहीं जानते थे।  


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।