कांग्रेस के हाथ से फिसलते पीढ़ियों पुराने रिश्ते, जितिन के बाद ललितेशपति के पार्टी छोड़ने से सतह पर आई अंतर्कलह

कांग्रेस के हाथ से फिसलते पीढ़ियों पुराने रिश्ते, जितिन के बाद ललितेशपति के पार्टी छोड़ने से सतह पर आई अंतर्कलह

उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में महज सात सीटों पर सिमटी कांग्रेस इस दफा प्रियंका वाड्रा के भरोसे बहुमत की सरकार बनाने के सपने संजो रही है, लेकिन कड़वी हकीकत आए दिन सामने आ रही है। संगठन की मजबूती के दावे कर रही पार्टी के हाथ से पीढ़ियों पुराने रिश्ते भी फिसलते जा रहे हैं। पुराने कांग्रेसियों की उपेक्षा के आरोप को भले ही पार्टी नेतृत्व खारिज करता रहे, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के बाद चार पीढ़ियों से पार्टी से जुड़े खानदान के नौजवान नेता ललितेशपति त्रिपाठी ने इसी आरोप के साथ कांग्रेस का हाथ झटककर अंतर्कलह और नेतृत्व की बेफिक्री को बेपर्दा कर दिया है।

कभी राजनीति का शक्ति केंद्र रहे वाराणसी के औरंगाबाद हाउस का कांग्रेस से दशकों पुराना नाता टूटा है तो इसकी मुख्य वजह सूबे में पार्टी के भीतर जारी खींचतान और अंतर्कलह है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेशपति त्रिपाठी का कांग्रेस को अलविदा कहना पार्टी को हाल के महीनों में लगा दूसरा झटका है।

 
पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल रहे जितिन प्रसाद के भाजपा का दामन थामने के बाद अब ललितेशपति के पार्टी छोड़ने पर पार्टी में नए-पुरानों के बीच चल रही उठापटक फिर उजागर हो गई है। वह भी तब चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने के साथ ही ब्राह्मणों को साधने के सभी जतन कर रहे हैं।

ललितेशपति पूर्वांचल में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में एक थे। हो सकता है कि मीरजापुर की मड़िहान सीट से 2012 में विधायक चुने जाने के बाद दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनाव में मिली पराजय ने राजनीतिक पुनर्वास के लिए उन्हें नया ठीहा तलाशने के लिए मजबूर किया हो, लेकिन उनके इस्तीफे से पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की टीस साफ सुनी जा सकती है। ललितेशपति ने गुरुवार को कहा भी कि पुराने कांग्रेसियों की उपेक्षा से आहत हैं। कुछ कमियां दिख रही थीं। उन्हें सुधारने के प्रयास सफल न होने पर यह कदम उठाना पड़ा।

कई वजहों से मजबूर हुए ललितेशपति : कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा के प्रदेश प्रभारी बनने के बाद से ही पार्टी में नए बनाम पुराने कार्यकर्ताओं की रस्साकशी शुरू हो गई थी। नए निजाम में पुराने कार्यकर्ता दरकिनार कर दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, इसी महीने जब प्रियंका वाड्रा लखनऊ आई थीं तो ललितेशपति ने उनसे मुलाकात करनी चाही थी, लेकिन नेहरू-गांधी कुनबे से अपने परिवार के दशकों पुराने संबंध के बावजूद उन्हें इसमें सफलता नहीं मिल सकी। वह लगातार उपेक्षा से आहत थे। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष के नाते मीरजापुर समेत पूर्वांचल के सात जिले उनके प्रभार में थे, लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र मीरजापुर में ही जिलाध्यक्ष उनकी मर्जी के खिलाफ नियुक्त हो गया।


सपा हो सकती है नया ठिकाना : पूर्व सांसद अन्नू टंडन के कांग्रेस छोड़कर सपा में जाने के साथ ही यह कयास लगने लगे थे कि ललितेशपति भी जल्द इसी राह पर चल देंगे। माना जा रहा है कि कांग्रेस छोड़ने के बाद ललितेशपति सपा में शामिल हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़ने पर ही 'जागरण' ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि पुराने सियासी खानदान के एक और युवा नेता जल्द कांग्रेस छोड़ सकते हैं। तब पार्टी नेतृत्व बेखबर रहा। फिर पिछले दिनों ललितेशपति ने प्रदेश उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, लेकिन पार्टी उन्हें मना नहीं सकी और अंतत: उन्होंने पार्टी को अलविदा कह ही दिया।


अखिलेश यादव की गणित सेट, जानिए कैसे जीतेंगे 300 से अधिक विधानसभा सीटों पर चुनाव

अखिलेश यादव की गणित सेट, जानिए कैसे जीतेंगे 300 से अधिक विधानसभा सीटों पर चुनाव

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में 400 से अधिक सीट जीतने का दावा करने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 300 से अधिक सीट जीतने का गणित सेट कर लिया है। बहुजन समाज पार्टी के नेताओं को समाजवादी पार्टी में शामिल कराने के बाद अब अखिलेश यादव की निगाह भारतीय जनता पार्टी के बागी विधायक तथा अन्य नेताओं पर है।

लखनऊ में रविवार को बहुजन समाज पार्टी के कई बड़े नेताओं को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाने के कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को लेकर भी अपना पत्ता खोल दिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि सुनने में आया है कि विधानसभा चुनाव 2022 के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने 150 विधायकों के टिकट काटने जा रही है। इससे पहले भी भाजपा के सौ विधायक सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विधानसभा में धरना पर बैठे थे। यह तो 250 हो गए। हमारे पास पहले से ही 50 विधायक हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण हमारे पक्ष में गिनती अपने आप सेट होती जा रही है। हम 2022 में 300 से अधिक सीट जीतेंगे। 300 का आंकड़ा तो बन गया है, अब बाकी की तैयारी तेज है।

समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में रविवार को बहुजन समाज पार्टी से सांसद रहे कादिर राणा के साथ बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेने के बाद आरएस कुशवाहा ने कहा कि प्रदेश में हमारे सभी समर्थक अब तो समाजवादी पार्टी के साथ हैं। पूरे प्रदेश से लोग हमारे साथ आए हैं। हम तो अपने समाज के लोगों को समाजवादी पार्टी से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बसपा अपने मूल विचारों से भटक गई है। सभी पुराने नेता बसपा को छोड़कर सपा में आ रहे हैं।मुजफ्फरनगर से सांसद रहे कादिर राणा अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इन सभी के साथ ही उत्तर प्रदेश के बड़े कर्मचारी नेता हरिकिशोर तिवारी भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष कर्मचारी नेता हरि किशोर तिवारी समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए हैं।