UP का पहला कोरोनामुक्त जिला बना महोबा, सीएम योगी ने की खूब तारीफ

UP का पहला कोरोनामुक्त जिला बना महोबा, सीएम योगी ने की खूब तारीफ

जून माह के प्रारंभ से ही कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार घटते क्रम में आ रही थी। अंतत: 21 जून आते-आते यह संख्या शून्य पर पहुंच गई। इस तरह बुंदेलखंड में महोबा पहला जनपद बन गया जहां कोरोना का एक भी केस नहीं बचा। बुंदेलखंड के जिले की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन को बधाई दी है।

प्रतिदिन हो रहीं 1300 से अधिक जांच: सोमवार को जिले में कोरोना का एक भी सक्रिय मरीज नहीं शेष रहा। सीएमओ डा. एमके सिन्हा ने बताया कि इस समय रोजाना 1300 से अधिक जांच हो रही हैं। जिले में पहला कोरोना केस बीते साल एक मई को मिला था। सबसे पहले जिला अस्पताल के दो कर्मचारी संक्रमित मिले थे। जिले में संक्रमितों के इलाज के लिए पनवाड़ी, चरखारी, श्रीनगर में कोविड अस्पताल बनाए गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांवों में लोगों को कोरोना से बचने के तरीके बताए।

प्रारंभ हुआ पायलट प्रोजेक्ट, 15 टीमें गठित: वैक्सीनेशन की गति बढ़ाने के लिए जुलाई से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत ब्लाकों में कलस्टर विभाजित कर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। कबरई ब्लाक से रविवार को इसकी शुरूआत हुई थी। यहां आठ गांवों में 18 साल से ऊपर के लोगों को टीका लगाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट में सबसे पहले कबरई ब्लाक चुना गया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. जीआर रत्मेले ने बताया कि कबरई के आठ गांवों में 21 व 22 जून को बूथ बनाकर टीकाकरण होगा। यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र के 15051 लोगों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य है। इन राजस्व गांव में 15 मोबीलाइजेशन टीमें बनाई गई हैं। जिसमें ग्राम प्रधान, लेखपाल, आशा, आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक तथा पंचायत सचिव शामिल रहेंगे। कबरई ब्लाक के आठ गांवों में सुरहा, कौहारी, गहरा बबेड़ी, बम्हौरी काजी, बघारी, धरौन व उटियां शामिल हैं।

क्या बोले सीएम योगी:  लखनऊ में कोविड-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम- 09 के साथ बैठक करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि महोबा में आज एक भी संक्रमित मरीज नहीं है। अब तक कोरोना संक्रमित हुए सभी मरीज उपचारित होकर स्वस्थ हो चुके हैं। इस उपलब्धि का श्रेय जिले  के जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों, निगरानी समितियों, स्थानीय प्रशासन सहित सभी जनपद के लोगों को जाता है। मुख्यमंत्री ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि संयम और जागरुकता का यह क्रम सतत बना रहे। उन्होंने कहा कि जनपद महोबा की यह उपलब्धि अन्य जनपदों के लिए प्रेरणास्पद है। अगले एक सप्ताह तक अगर जिले में संक्रमण का कोई केस नहीं मिलता है, तो जनपद को पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जिले में एग्रेसिव टेस्टिंग जारी रखी जाए। टेस्ट में कोई कमी न हो।  


CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

CM के पास पहुंचा जीएसवीएम मेडिकल कालेज का मामला

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के गलत निलंबन प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव से रिपोर्ट तलब की है। शासन ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी मांगी है। ऐसे में अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नेहा अग्रवाल की इस प्रकरण में किसी प्रकार की गलती न होने की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे में डा. नेहा का निलंबन वापस होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) की प्रभारी डा. नेहा अग्रवाल ने पांच जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर वेंटिलेटर की स्थिति से अवगत करा मरम्मत कराने का आग्रह किया था। विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव ने उनके पत्र का हवाला देते हुए सिर्फ एग्वा वेंटिलेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही वेंटिलेटर के रुकने की वजह से बच्चे की मौत होने का हवाला दिया था। भविष्य में ऐसे वेंटिलेटर का इस्तेमाल रोगी हित में न करने की बात कही थी। शासन ने जब रिपोर्ट तलब की तो प्राचार्य प्रो. संजय काला को गुमराह करते हुए डा. नेहा के खिलाफ आख्या शासन भिजवा दी। जब सच्चाई सामने आई तो सरकार की किरकिरी होने लगी। मुख्यमंत्री ने शासन से रिपोर्ट मांगी है। प्राचार्य प्रो. संजय काला का कहना है कि डा. नेहा के निर्दोष होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उनकी कोई गलती नहीं है।


निलंबन से डाक्टरों में नाराजगी : डा. नेहा अग्रवाल का शासन के स्तर से गलत निलंबन होने से मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों में नाराजगी है। बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं कालेज के प्राक्टर प्रो. यशवंत राव द्वारा अपने ही विभाग की डाक्टर के खिलाफ गलत सूचना देने की वजह से लामबंद हो रहे हैं।