यूपी में कोरोना ढाएगा कहर, मतगणना में टूटे नियमों पर SC का क्‍या होगा रुख

यूपी में कोरोना ढाएगा कहर, मतगणना में टूटे नियमों पर SC का क्‍या होगा रुख

लखनऊ: तमाम आशंकाओं के बावजूद उत्‍तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ठीक वैसा ही हलफनामा दिया जैसा कभी अयोध्‍या मामले में कल्‍याण सिंह की सरकार ने दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर भरोसा किया और रविवार को सभी ने देखा कि प्रदेश के कई जिलों में मतगणना के दौरान सारे नियम टूट गए। पुलिस को कई स्‍थानों पर बल प्रयोग भी करना पड़ा। सवाल है कि इस लापरवाही का खामियाजा क्‍या पूरे प्रदेश की जनता को भुगतना होगा। क्‍या कोरोना का कहर प्रदेश पर टूटेगा और इससे भी बड़ा सवाल है कि इतनी बड़ी आबादी को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा देने के लिए क्‍या उत्‍तर प्रदेश सरकार तैयार है।

उत्‍तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट का है लेकिन इससे पहले यूपी सरकार ने कई मामलों में हाईकोर्ट के फैसले को नहीं माना। सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सरकारी अधिकारियों के बच्‍चों को प्राथमिक स्‍कूलों में शिक्षा दिलाने का फैसला आज तक कागजों में ही बना हुआ है। इससे साफ है कि सरकार भी वही चाहती थी, जो हाईकोर्ट ने किया और सरकार ने हाईकोर्ट की आड़ का सहारा लिया है। पंचायत चुनाव के लिए कराए गए मतदान के दौरान बड़ी तादाद में कर्मचारी कोरोना के चपेट में आए। मतगणना शुरू होने के एक दिन पहले तक 706 प्राथमिक शिक्षकों की कोरोना से मौत हो चुकी थी। इस पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की लेकिन आयोग की दलीलों पर भरोसा करते हुए मतगणना की अनुमति दे दी।

सुप्रीम कोर्ट का टूटा भरोसा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्‍य निर्वाचन आयोग की तैयारियों पर भरोसा किया। मतगणना की अनुमति दी। आयोग के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि कोरोना टेस्‍ट के बाद ही मतगणना स्‍थल में लोगों को प्रवेश दिया जाएगा। मतगणना स्‍थल के बाहर भीड़ एकत्र नहीं होने देंगे लेकिन सारे वादे टूटते देखे गए। सभी ने देखा कि मतगणना स्‍थलों के बाहर भारी भीड़ जुटी रही। कई जिलों में पुलिस ने बल प्रयोग भी किया लेकिन बड़ी लापरवाही पूरे प्रदेश में देखने को मिली है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र के विशेषज्ञ डरे हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि 15 मई को देश में कोरोना पीक का समय माना जा रहा है लेकिन यूपी में पंचायत चुनाव और मतगणना में हुई लापरवाही का खामियाजा बड़ी आबादी को भुगतना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमित मिल सकते हैं और इनके इलाज की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था मौजूद नहीं है। शहरी क्षेत्रों में ही मिल रहे मरीजों के मामले में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग पस्‍त हो चुका है। संसाधन फेल हो चुके हैं ऐसे में अगर आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह होती है तो इसके लिए प्रदेश सरकार का पंचायत चुनाव कराने का फैसला और मतगणना पर रोक नहीं लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला दोनों ही जिम्‍मेदार होंगे।


CM योगी का बड़ा आदेश, उत्तर प्रदेश में किन कर्मचारियों काे मिलेगी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

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यूपी सीम योगी आदित्यनाथ ने बोला है कि सभी सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में बीमार, दिव्यांग कर्मचारी और गर्भवती महिला कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा दी जाए. इन्हें ऑफिस आने की कोई अनिवार्यता नहीं है. इसी प्रकार, सभी सरकारी कार्यालयों में 50 परसेंट कार्मिक क्षमता से ही काम लिया जाए. एक समय मे एक तिहाई से अधिक कर्मचारी कतई मौजूद न रहें. इस व्यवस्था को तत्काल कारगर बनाया जाए.

मुख्यमंत्री ने टीम 9 के साथ मीटिंग में बोला कि कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट' की रणनीति के साथ-साथ प्रदेशवासियों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर प्रदान करने की रणनीति के अच्छे रिज़ल्ट देखने को मिल रहे हैं. बीते 30 अप्रैल को कुल 03 लाख 10 हजार केस सक्रिय थे. आज एक हफ्ते की अवधि में 55,000 सक्रिय केस कम हुए हैं. 24 अप्रैल को सर्वाधिक 38 हजार पॉजिटिव केस आये थे, तब से नए केस में लगातार गिरावट आ रही है. साथ ही, स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या प्रत्येक दिन बढ़ती जा रही है. रिकवरी दर बेहतर होता जा रहा है. 24 घंटे में 2,41,403 कोविड टेस्ट किए गए हैं. इसी अवधि में 28,076 नए पॉजिटिव केस की पुष्टि हुई है, जबकि 33,117 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं. वर्तमान में 2,54,118 कुल सक्रिय केस हैं. इनमें 1,98,857 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं.

मुख्यमंत्री ने बोला कि  वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में तेजी से चल रही है. अब तक 01 करोड़ 34 लाख 30 हजार से अधिक डोज लगाए जा चुके हैं. अधिक संक्रमण दर वाले सात जिलों में 18-44 आयु वर्ग के 85,566 लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है. यह अच्छा है कि इस आयु वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज घटकर 0.11 परसेंट रह गया है. इसे शून्य तक लाने की जरूरत है. उन्होंने बोला कि आनें वाले सोमवार से 11 और जिलों में 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान का शुरुआत होगा. सम्बंधित प्रभारी मंत्री/स्थानीय जनप्रतिनिधि किसी न किसी टीकाकरण केन्द्र पर मौजूद रहें. लोगों का उत्साहवर्धन के लिए जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सहायक होगी. चिकित्सा एजुकेशन मंत्री के स्तर से वैक्सीन निर्माता कंपनियों से सतत सम्पर्क बनाये रखा जाए. प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर निशुल्क मौजूद करा रही है. स्वास्थ्य जानकारों के परामर्श के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित अथवा लक्षण वाले लोग अभी टीकाकरण न कराएं. इसी प्रकार स्वास्थ्य जानकारों का यह भी मानना है कि कोविड संक्रमित आदमी को स्वस्थ होने के न्यूनतम एक माह बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए. स्वास्थ्य संबंधी इन जरूरी जानकारियों से लोगों को जागरूक किया जाए.

मुख्यमंत्री ने बोला कि यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकाकरण केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का कठोरता से अनुपालन हो. ऑन-द-स्पॉट  पंजीयन से अव्यवस्था हो सकती है. अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए औनलाइन  पंजीयन व्यवस्था को ही लागू रखना उचित होगा. जिनकी बारी है उनसे यथासंभव एक-दो दिन पूर्व फोन से सम्पर्क कर लिया जाना उचित होगा. संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए गांव-गांव टेस्टिंग का महा अभियान चल रहा है. लोग इसमें योगदान कर रहे हैं. नज़र समितियां घर-घर जाएं, स्क्रीनिंग करें, होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट मौजूद कराएं. लक्षणयुक्त लोगों के बारे में आरआरटी को सूचना देकर उनका एंटीजन टेस्ट कराया जाए. डीएम और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि टेस्ट की यह प्रक्रिया गांव में ही हो. सीएचसी/पीएचसी पर जाने की कोई अवश्यकता नहीं है. आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी के लिए विशेष कोशिश किए जाएं. कांटेक्ट ट्रेसिंग और बेहतर करने की आवश्यकता है.


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