CAA : यूपी में क़रीब 2 दर्जन ज़िलों में हुई हिंसा को लेकर पुलिस लगी जाँच में

CAA : यूपी में क़रीब 2 दर्जन ज़िलों में हुई हिंसा को लेकर पुलिस लगी जाँच में

यूपी में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर क़रीब 2 दर्जन ज़िलों में हुई हिंसा को लेकर पुलिस लगातार जाँच कर रही है। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या यह हिंसा सिर्फ भीड़ के गुस्से की वजह से हुई? या फिर इस हिंसा को नियोजित तरीक़े से कराया गया है? पुलिस की अब तक की जाँच में पीएफआई (PFI) यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नाम के संगठन का नाम सामने आ रहा है।

 उत्तर प्रदेश के भिन्न-भिन्न ज़िलों से अब तक दर्जन भर से ज़्यादा पीएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। बताया ये भी जा रहा है कि पीएफआई में शामिल वो लोग हैं, जो सिमी (SIMI) संगठन के प्रतिबंधित होने के बाद फिर से सक्रिय होने के लिए नए नाम से बने पीएफआई में कार्य करने के लिए इकट्ठे हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई की किरदार संदिग्ध है। पुलिस व सरकार ने दावा किया है कि प्रतिबंधित संगठन सिमी के लोग पीएफआई नाम के संगठन में शामिल हुए व इन लोगों ने नियोजित तरीक़े से हिंसा करने के लिए लोगों को उकसाया। पीएफआई ने कैसे उत्तर प्रदेश में हिंसा को बढ़ावा दिया? ये जानने से पहले ये समझिए कि पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है क्या? पुलिस के अनुसार पीएफआई एक उग्र इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है। देश में इस्लामिक स्टूडेंट्स मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी पर प्रतिबंध के बाद देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में कई संगठन खड़े किए गए।

2006 में गठन, 2010 में रजिस्ट्रेशन

इसमें पीएफआई, एसआईएफआई, एसडीपीआई व एफआईआर जैसे संगठन शामिल हैं। पीएफआई की बात करें तो वर्ष 2006 में इसका गठन हुआ व रजिस्ट्रेशन 2010 में दिखाया गया है। इस संगठन की किरदार कई मामलों में संदिग्ध रही है। इसे झारखंड में पिछले वर्ष फरवरी में इस संगठन को प्रतिबंधित किया था। राज्‍य सरकार ने ये कदम इस संगठन के देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत मिलने के बाद उठाया था। हालांकि यह मुद्दा बाद में न्यायालय चला गया, जहां न्यायालय ने अगस्त में पीएफआई पर प्रतिबंध हटा दिया।

फिर दिसंबर 2018 में प्रदेश सरकार ने प्रतिबंध का आदेश दिया, जिस पर फरवरी 2019 में अमल करते हुए इनको प्रतिबंधित कर दिया गया। सरकार का बोलना था कि यह संगठन प्रदेश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का कार्य कर रहा है। 2018 में ही इस संगठन को लेकर केरल में जबरदस्‍त बवाल हुआ था व इसको प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी। हालांकि राज्‍य सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया था।

13 राज्यों में है पीएफआई की पहुंच

पुलिस के अनुसार पीएफआई खुद को एक ऐसे संगठन के तौर पर प्रदर्शित करता है, जो लोगों को उनके हक दिलाने व सामाजिक हितों के लिए कार्य करता है। हालांकि आरोप ये भी है कि पीएफआई पहले भी कई तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल रहा है। वर्तमान में पीएफआई का प्रभाव 13 राज्यों में है व कई मुस्लिम संगठन इससे सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस संगठन के सदस्‍यों की संख्‍या हजारों में पहुंच चुकी है। लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा में अब तक की जाँच में पता चला है कि पीएफआई से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सऐप पर भड़काऊ मैसेजेस भेजकर लोगों को उकसाने का कार्य किया। लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी कहते हैं कि लखनऊ, शामली व मेरठ से पीएफआई के कार्यकर्ताओं को अरैस्ट भी किया गया है। इनके पास से मोबाइल पर भड़काऊ मैसेजेस व ऐसे दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं, जो हिंसा में लोगों को उकसाने में इस्तेमाल किये गए थे।

लखनऊ में पीएफआई के 3 सदस्यों की हुई गिरफ्तारी: आईजी

इस मुद्दे में हमने आईजी रेंज, लखनऊ एसके भगत से बात की तो उन्होंने बताया कि सिमी के बैन होने के बाद इस संगठन को खड़ा किया गया। लखनऊ में पीएफआई के 3 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनके पास से आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुई हैं। इस मुद्दे में अन्य तथ्यों की जाँच की जा रही है। भगत ने बोला कि पीएफआई की उत्पत्ति के बाद रेडिक्लाइज़्ड लोग शामिल रहे हैं। सिमी पर बन्द होने के बाद सिमी में सक्रिय लोगों का पीएफआई में होने की बात सामने आ रही है।

जांच पूरी होने के बाद महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे: श्रीकांत शर्मा

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने भी माना कि सिमी की तरह ही पीएफआई की किरदार सामने आ रही है। उन्होंने बोला कि हर एंगल से मुद्दे की जाँच की जा रही है। पीएफआई पर प्रतिबंध के सवाल पर श्रीकांत शर्मा ने सीधे-सीधे हां तो नहीं किया लेकिन इशारों में ये ज़रूर बोला कि जाँच पूरी होने के बाद ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बोला कि जो लोग पहले सिमी संगठन में थे, उन्होंने एक नया संगठन बनाया है। जाँच में यह बात सामने आई है कि इन लोगों का हिंसा में हाथ है हम जाँच कर कार्यवाही करेंगे।

कुल मिलाकर साफ है देश में प्रतिबंधित संगठन सिमी के बंद होने के बाद पीएफआई ने अपना पैर पसारना प्रारम्भ कर दिया है हालांकि यह बात प्रदेश में हुई हिंसा के बाद सामने आई व अब उत्तर प्रदेश समेत कई जाँच एजेंसियां और पुलिस की टीम इस संगठन के बारे में तह तक जा रहे हैं। इनके जड़ों को तलाश रही हैं। जांचें संकेत कर रही हैं कि संगठन में ज्यादातर वह लोग हैं जो कभी सिमी के सक्रिय मेम्बर हुआ करते थे।  ये अभी संगठन के माध्यम से खड़े होने की प्रयास कर रहे हैं। जानकरी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग तय कर दिया है कि पुख्ता जाँच के बाद पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। जिसे लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस व उत्तर प्रदेश का गृह विभाग जाँच रिपोर्ट कंपाइल कर रहा है।