पुजारा ने बोला- "थूक से गेंद चमकाने पर प्रतिबंध सही"

पुजारा ने बोला- "थूक से गेंद चमकाने पर प्रतिबंध सही"

हर आम व खास आदमी की तरह क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा भी लॉकडाउन के बाद से ही परिवार के साथ कीमती वक्त बिता रहे हैं. साथ ही एक खिलाड़ी होने के नाते खुद को फिट रखने पर भी फोकस रखे हुए हैं. 

मैदान से दूर चार महीने से पिता, पत्नी व बेटी के साथ वक्त बिता रहे पुजारा कहते हैं कि- लॉकडाउन से सीख मिली है कि भागदौड़ भरी जिंदगी से परिवार के लिए वक्त निकालना बहुत महत्वपूर्ण है.

पुजारा ने कहा-मैं सभी फॉर्मेट में खेलने के लिए फिट हूं. घरेलू क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है.

हैंड-ऑई को-ऑर्डिनेशन साधने पर देना होगा जोर
पुजारा सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा की उस बात का समर्थन करते हैं जिसमें शर्मा ने बोला था कि लॉकडाउन के बाद बल्लेबाज जब मैदान पर उतरेंगे तो उन्हें हैंड-ऑई को-ऑर्डिनेशन में तकलीफ से दो-चार होना पड़ेगा. पुजारा का बोलना है कि हर खिलाड़ी की मानसिकता अलग होती है. बल्लेबाज हो या गेंदबाज लंबे समय के बाद मैदान में उतरने पर खिलाड़ियों को लय पकड़ने में वक्त लगता ही है. हां, प्री-प्रिपरेशन के लिए दो महीने का वक्त मिले तो सभी खिलाड़ी खुद को फिट हो सकते हैं.

थूक से गेंद चमकाने पर प्रतिबंध सही
गेंद को थूक से चमकाने पर लगे प्रतिबंध का समर्थन करते हुए पुजारा ने बोला कि आईसीसी ने यह फैसला वर्तमान परिस्थिति व खिलाड़ियों सहित सभी की सुरक्षा सहित कारणों को मद्देनजर रखते हुए लिया है जो उचित है. महामारी के मद्देनजर ये निर्णय लिया गया है जो संभव है आगामी दिनों में हट भी जाए.

करियर में दूसरी बार इतना लंबा ब्रेक
2009 व 2011 में चोट की वजह से ऑपरेशन करवाना पड़ा. तब 6 माह से ज्यादा आराम करना पड़ा था. उसके बाद दूसरा मौका है जब इतने लंबे समय से आराम कर रहा हूं. वैश्विक महामारी में चार महीने से परिवार के साथ हूं-मददगार होते हुए सक्रिय हूं.

क्रिकेट मुकाबले कब से
फिलहाल तो ऐसे कोई संभावना नजर नहीं आते. मेरा मानना है कि अभी कुछ व वक्त तक इंतजार करना होगा-ये महत्वपूर्ण है. हां, आउट डोर प्रैक्टिस प्रारम्भ होने से खिलाड़ी लाभान्वित होंगे.

विदेशी टी-20 लीग में मिलें अवसर
विदेश की लीग टूर्नामेंट में खेलने की ख़्वाहिश तमाम क्रिकेटरों की होती है लेकिन इसका फैसला बीसीसीआई करती है. क्रिकेट जगत में भारतीय प्रीमियर लीग बहुत ही प्रचलित है जिसमें देश के खिलाड़ियों को मौका मिलते ही है. बोर्ड की ख़्वाहिश है कि विदेशी लीग टूर्नामेंट के मुकाबले क्रिकेटर आईपीएल ज्यादा खेलें.