दिव्या को मिली यह बड़ी अनुमति, आइए जानिए

दिव्या को मिली यह बड़ी अनुमति, आइए जानिए

दिव्या के स्वर्ण पदक जीतने की खुशी भाई देव काकरान व दोस्त नीना के चेहरे पर देखते ही बनती थी. देव खुद तो पहलवान नहीं बन पाए, लेकिन वह मैट पर बहन के साथी बन गए. बहन को मैट पर प्रैक्टिस के लिए मजबूत पहलवान मिले इसके लिए उन्होंने लखनऊ साई सेंटर के बाहर किराए का मकान लिया.

सार
भाई से किए दो-दो हाथ व दोस्त ने दिया सहारा
18 वर्ष से हिंदुस्तान से जुड़े कोच ब्लादीमीर ने दिव्या की तकनीक को सुधारा
कुश्ती संघ ने भी दिव्या को कैंप में मैट पर प्रैक्टिस कराने की अनुमति दे दी. यही नहीं दिव्या की दोस्त नीना ने कमरे पर उनका ख्याल बड़ी बहन सरीखा रखा. दिव्या कैंप में कैंटीन में नहीं बल्कि नीना के हाथ बना खाना खाती है. यही कारण था कि सीनियर वर्ग में पहली बार स्वर्ण जीतने पर दिव्या के मुंह से देव व नीना के लिए तारीफों के शब्द थम नहीं रहे थे.

सिर्फ देव व नीना ही नहीं भारतीय कुश्ती के पितामाह माने जाने वाले जार्जियाई कोच ब्लादीमीर मेट्रेशविली ने बीचे छह माह में दिव्या की तकनीक पर खूब कार्य किया. दिव्या के मुताबिक वह खूब मेहनत कर रही थीं, लेकिन परिणाम सामने नहीं आ रहे थे. ऐसे में उन्होंने ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट से सुशील कुमार के साथ जुड़े कोच कोच ब्लादीमीर को मांगा.

दिव्या के मुताबिक ब्लादीमीर के आने के बाद ही उन्हें यह परिणाम मिला है. वहीं दिव्या के पिता को दुख है कि उनकी बेटी रहती तो दिल्ली में है, लेकिन उसे अपनाया यूपी ने. दिल्ली की ओर से दिव्या को कभी नहीं अपनाया गया इसका उन्हें हमेशा दुख रहेगा.

कुत्तों ने कैमरों को पहुंचाया नुकसान


एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में युनाइटेड वल्र्ड रेसलिंग व प्रसारण कंपनी  केलिए कुत्ते मुसीबत बन गए. कुत्तों ने मैट के सामने लगे कैमरे की तार को नोच डाला. यही नहीं एक मैट पर लगे कैमरों को कुत्तों ने बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. आज प्रातः काल मुकाबले प्रारम्भ होने से पहले ही कुत्तों  की इस हरकत को पकड़ लिया गया. इसकी शिकायत भी की गई व मुद्दे को सुलझा लिया गया.