बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने बोला, "क्रिकेट सलाहकार समिति के गठन को लेकर प्रकिया जारी"

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने बोला, "क्रिकेट सलाहकार समिति के गठन को लेकर प्रकिया जारी"

टीम इंडिया (Team India) के पूर्व कैप्टन सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को बीसीसीआई अध्यक्ष (BCCI President) बने हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है। इस दौरान उन्होंने हिंदुस्तान का पहला डे-नाइट टेस्ट (Day Night Test) आयोजित करने में अहम किरदार निभाई। अब रविवार को हुई बीसीसीआई की एजीएम में भी गांगुली ने कई अहम फैसलों पर मोहर लगा दी है। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सौरव गांगुली ने यह भी माना है कि बीसीसीआई संविधान के क्लॉज 38 के चलते देश का कोई भी पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में मानद आधार पर सेवाएं नहीं देना चाहता।

बदलना ही चाहिए हितों का विवाद संबंधी नियम
दरअसल, जब उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने वर्ष 2015-16 में सबसे पहले बीसीसीआई (BCCI) से जुड़े इस मुद्दे की सुनवाई प्रारम्भ की थी, तो सबसे बड़ी चिंता यही थी कि पूर्व क्रिकेटर क्रिकेट प्रशासन का भाग नहीं हैं। मगर गांगुली (Sourav Ganguly) की अगुआई वाली बीसीसीआई का मानना है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित प्रशासकों की समिति द्वारा शामिल किया गया क्लॉज पूर्व क्रिकेटरों को प्रशासन में शामिल करने के विचार के बिल्कुल उल्टा है। गांगुली के अनुसार, 'हितों के विवाद (Conflict Of Interest) संबंधी नियम का कोई मतलब नहीं है। इसे बदलना ही चाहिए। मैंने पहले भी ऐसा बोला है। '

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने बोला है कि क्रिकेट सलाहकार समिति के गठन को लेकर प्रकिया जारी है। (पीटीआई)


कोई पूर्व क्रिकेटर आगे नहीं आ रहा
उदाहरण के तौर पर, 'मान ली‌जिए कि राष्ट्रीय चयनकर्ता का भतीजा टीम इंडिया (Team India) के लिए खेल रहा है तो चयनकर्ता को हितों के विवाद के दायरे में माना जाएगा। लेकिन अगर चयनकर्ता के दोस्त का बेटा जो चयनकर्ता के अपने भतीजे से ज्यादा करीब हो, वो टीम इंडिया के लिए खेल रहा हो तब क्या होगा? ऐसे में कौन ये अनुमान लगा सकता है कि ये हितों के विवाद (Conflict Of Interest) का मुद्दा नहीं है। ' हितों के विवाद संबंधी नियम के चलते ही बीसीसीआई (BCCI) क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) का गठन नहीं कर पा रही है। कोई भी पूर्व क्रिकेटर इस समिति का भाग बनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, क्योंकि चयनकर्ताओं की नियुक्ति के बाद अगले दो वर्ष तक उसके पास करने के लिए कुछ कार्य नहीं होगा।

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के प्रयासों के चलते ही भारतीय टीम कोलकाता में अपना पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेल सकी थी।


हितों के विवाद पर रुख स्पष्ट करना चाहते हैं
क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) के बारे में सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने कहा, 'सीएसी (CAC) के पास ज्यादा कार्य नहीं है। हम लगातार इसके बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन सीएसी का कार्य चयनकर्ता व कोच की नियुक्ति करने का है। ऐसे में जब आप चयन समिति (Selection Panel) नियुक्त कर देते हैं तो ये चार वर्ष तक चलती है। कोच (Coach) नियुक्त होने के बाद तीन वर्ष का कार्यकाल होता है। ऐसे में फुल टाइम सीएसी की क्या आवश्यकता है। कुछ दिन इंतजार करते हैं। हम सीएसी बनाएंगे। मैं हितों के विवाद मुद्दे पर एथिक्स अधिकारी (Ethics Officer) डीके जैन (DK Jain) से मिल चुका हूं। हम किसी आदमी को नियुक्त नहीं करना चाहते जिसकी नियुक्ति खारिज कर दी जाए। हम पहले डीके जैन से बिल्कुल स्पष्ट रुख हासिल करना चाहते हैं कि क्या हितों का विवाद है व क्या नहीं। '