मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था को एक बार फिर सस्ते लोन का डोज देने की प्रयास की जाएगी, जानिए क्यों

मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था को एक बार फिर सस्ते लोन का डोज देने की प्रयास की जाएगी, जानिए क्यों

मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था को एक बार फिर सस्ते लोन का डोज देने की प्रयास की जाएगी. गुरुवार को आरबीआइ मौद्रिक नीति की इस वर्ष अंतिम बार समीक्षा करेगा व इसके सारे संभावना हैं कि रेपो रेट में फिर 25 आधार अंकों की कटौती की जाएगी. यह दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर के घट कर 4.5 फीसद पर आने व घरेलू मांग की स्थिति में बहुत सुधार नहीं होने के मिल रहे संकेतों की वजह से किया जाएगा. मौद्रिक नीति तय करने के लिए आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मीटिंग मंगलवार से मंुबई में मीटिंग शुरु हो गई. उम्मीद के मुताबिक अगर आरबीआइ रेपो रेट घटाता है तो यह इस साल ब्याज दरों को कम करने की छठी प्रयास होगी.

रेपो रेट वह दर है जिस पर अल्पकालिक अवधि के लिए बैंकों को आरबीआइ अलावा फंड उपलब्ध कराता है. यह दर बैंकों के होम लोन, आटो लोन, व्यक्तिगत कर्ज़ और अन्य कारोबारी कर्ज़ की दरों को तय करने में सबसे अहम किरदार निभाते हैं. अब जबकि बैंकों की खुदरा लोन की दरों को रेपो रेट से जोड़ दिया गया है तो इसमें की जाने वाली कटौती के बाद लोन सस्ते हो जाते हैं. जनवरी, 2019 के बाद से अभी तक रेपो रेट में 135 आधार अंकों (1.35 फीसद) की कटौती की जा चुकी है. यह भी उल्लेखनीय तथ्य यह है कि आरबीआइ गवर्नर दास की अध्यक्षता में अभी तक जितनी भी एमपीसी की मीटिंग हुई है उसमें रेपो रेट को कम किया गया है. यह अलग बात है कि बैंकों की तरफ से लोन वितरण के जो आंकड़े बाहर आये हैं उससे इसका खास लाभ होता नहीं दिख रहा है.

 

दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर के पिछले छह वर्षो के सबसे न्यूनतम स्तर पर आने के बीच वजह यही बताया जा रहा है कि आम जनता और इंडस्ट्री की तरफ से मांग नहीं आ रही है. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट के ताजा आंकड़ों से यह बात ठीक साबित हो रही है. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्वीटिज के वाइस प्रेसिडेंट और सीनियर इकोनोमिस्ट सुवोदीप रक्षित का बोलना है कि निश्चित तौर पर एमपीसी के लिए वैसे विकास दर की गति को बढ़ाना ही सर्वप्रमुख वरीयता होगी. प्याज की कीमतों में हाल की तेजी के बावजूद महंगाई की स्थिति बेहद चिंताजनक नहीं है.

 

हमें उम्मीद है कि रेपो रेट में 40 आधार अंकों की नयी कटौती की जाएगी ताकि मार्केट और कंपनियों को व सकारात्मक संदेश भेजा जाए. इनका यह भी बोलना है कि मांग जिस स्तर पर है उसे देखते हुए लोन की दरों में भारी कटौती करने से ही बात बनेगी. संभवत: यही वजह है कि नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बजाज मानते हैं कि अभी रियल एस्टेट की जो स्थिति है उसे देखते हुए रेपो रेट में 100 आधार अंकों की कटौती करनी चाहिए. यह एक साथ कई औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देगा.