GST रेवेन्यू की सीमित गति अब केन्द्र के साथ साथ प्रदेश सरकारों को भी करने लगी चिंतित

GST रेवेन्यू की सीमित गति अब केन्द्र के साथ साथ प्रदेश सरकारों को भी करने लगी चिंतित

GST रेवेन्यू की सीमित गति अब केन्द्र के साथ साथ प्रदेश सरकारों को भी चिंतित करने लगी है. संभवत: इसीलिए GST काउंसिल की अगली मीटिंग में रेवेन्यू की स्थिति चर्चा का अहम मामला होगा.

 दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में काउंसिल की मीटिंग होने की आसार है. पिछले कुछ महीनों से GST से प्राप्त होने वाले रेवेन्यू व सेस कलेक्शन की गति बहुत ज्यादा धीमी रही है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इसे लेकर न केवल केन्द्र बल्कि प्रदेश सरकारों में भी चिंता बनी हुई है. ऐसे में राज्यों को अनुमानित रेवेन्यू के नुकसान की भरपाई की राशि में भी वृद्धि की जरूरत अनुभव की जा रही है.

सूत्र बताते हैं कि रेवेन्यू की गति यही बनी रही तो राज्यों को की जाने वाली भरपाई के लिए कंपनसेशन सेस से प्राप्त होने वाली राशि नाकाफी साबित हो सकती है. अभी तक इसी सेस से प्राप्त रेवेन्यू से राज्यों को रेवेन्यू में कमी की भरपाई की जाती है. मंत्रालय ने रेवेन्यू की इस स्थिति को देखते हुए सभी राज्यों के GST आयुक्तों से रेवेन्यू बढ़ाने के तरीकों के लिए सुझाव देने को बोला है. सूत्रों के मुताबिक इन आयुक्तों को लेटर लिखकर पांच अहम मुद्दों पर सुझाव मांगे गये हैं. पहला, जिन आइटम को अभी GST के दायरे से बाहर रखा गया है क्या उनकी समीक्षा की जानी चाहिए? इसके अतिरिक्त सरकार GST व कंपनसेशन रेट पर भी पुनर्विचार करने की संभावनाएं तलाश रही है.

साथ ही विभिन्न आइटमों पर लागू रेट पर भी समीक्षा के बारे में राज्यों को सुझाव देने को बोला गया है. सूत्रों ने बोला कि सरकार GST के इनवर्टड ड्यूटी स्ट्रक्चर के अनुरूप दरों को तय करने के मुद्दे में भी राज्यों के सुझाव चाहती है. साथ ही राज्यों से पूछा गया है कि क्या वर्तमान में लागू कंप्लायंस तरीकों के अतिरिक्त नए तरीकों पर विचार किया जा सकता है? इसके अलावा राज्यों से रेवेन्यू में वृद्धि के नए सुझाव या तरीका सुझाने को भी बोला गया है. राज्यों के GST कमिश्नरों को अपने सुझाव 6 दिसंबर तक भेजने को बोला गया है. सूत्रों का बोलना है कि तय अवधि तक जिन राज्यों के सुझाव प्राप्त हो जाएंगे उनकी केन्द्र और राज्यों के अधिकारियों की समिति समीक्षा करेगी.

 

इसलिए सभी राज्यों से विस्तार में सारे विश्लेषण के साथ सुझाव भेजने का बोला गया है ताकि तय समय के भीतर मीटिंग से पहले इस पर विचार हो सके. बताते चलें कि नवंबर 2019 में GST का कलेक्शन 103492 करोड़ रुपये रहा है. इस वित्त साल में यह चौथा महीना है जब GST रेवेन्यू का कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये को पार किया है. इसके अलावा देश में GST लागू होने के बाद यह तीसरा सर्वाधिक GST कलेक्शन रहा है. केन्द्र व राज्यों की चिंता की वजह यही है. GST संग्रह में अपेक्षानुरुप वृद्धि नहीं होने की एक वजह तो मंदी के चलते कई उत्पादों की दरों को कम किया गया. इसका भी प्रभाव GST कलेक्शन पर पड़ा है. लेकिन रेवेन्यू में अपेक्षा के मुताबिक वृद्धि नहीं होने से कंपनसेशन सेस के मोर्चे पर दबाव बनता जा रहा है. राज्यों को दिया जाने वाला मुआवजा इसी मद से जाता है.