शेयर बाजारों ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का लाइसेंस निलंबित करने का किया निर्णय, ये हैं कारण

शेयर बाजारों ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का लाइसेंस निलंबित करने का किया निर्णय, ये हैं कारण

देश के दोनों प्रमुख शेयर बाजारों ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का लाइसेंस निलंबित करने का निर्णय किया है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) व बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने एक सर्कुलर जारी करते हुए यह आदेश दिया है. इससे पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) व एमएसईआई ने कंपनी का ट्रेडिंग लाइसेंस निलंबित कर दिया था.

22 नवंबर को सेबी ने लिया था यह फैसला

इससे पहले 22 नवंबर को मार्केट नियामक सेबी ने निर्णय देते हुए नए क्लाइंट्स के साथ व्यापार करने पर रोक लगा दी थी. इसके साथ ही सेबी ने सभी एक्सचेंज से कार्रवाही करने के लिए बोला था. सेबी ने बोला था कि ब्रोकरेज कंपनी ने अपने क्लाइंट की जमा रकम को अपनी सहयोगी कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर कर दिया था. 

कभी नहीं थी अनुमति

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग मुद्दा सामने आने के बाद पूंजी मार्केट नियामक सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने बुधवार को बोला कि यह ब्रोकरेज कंपनी उन गतिविधियों से शामिल पाई गई, जिनकी कभी अनुमति नहीं थी. उन्होंने बोला कि जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक सर्कुलर जारी कर इस मुद्दे में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी व बोला था कि किसी भी इकाई को ऐसी गतिविधियों में लिप्त नहीं होना चाहिए. इससे पहले की भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्तता स्वीकार नहीं होगी. 

 

त्यागी ने कंपनी संचालन पर आयोजित आर्थिक योगदान एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की एशियाई मीटिंग से अलग कहा, ‘बुनियादी तौर पर जिसकी कभी अनुमति नहीं थी, वह कार्य हो रहा था. ऐसा नहीं है कि इसके लिए जून में ही मना किया गया है. चाहे इस मुद्दे में स्पष्ट तौर पर पहले कुछ भी नहीं बोला गया था, फिर भी आप अपने स्तर पर ग्राहकों के शेयरों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं व ऐसा करने की अनुमति किसी को नहीं है.’ उन्होंने दोहराया यह बुनियादी मामला है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है. 

एनएसई ने भेजी थी प्राथमिक रिपोर्ट

दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इस मुद्दे में सेबी को प्राथमिक रिपोर्ट भेजी थी, जिसके बाद सेबी ने यह कदम उठाया. मार्केट नियामक ने एक आदेश में बोला कि एक्सचेंज की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद ही कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के विरूद्ध 19 अगस्त को सीमित जाँच की गई. इसमें एक जनवरी के बाद के सौदों की जाँच की गई. सेबी के पूर्णकालिक मेम्बर अनंत बरुआ की 12 पन्ने के अंतरिम आदेश में बोला गया है कि मुद्दे में ग्राहकों के शेयरों का आगे दुरुपयोग रोकने के लिए तुरंत नियामकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है. ब्रोकरेज कंपनी पर नए ग्राहक जोड़ने पर प्रतिबंध लगाने के अतिरिक्त नियामक ने एनएसडीएल व सीडीएसएल को आदेश दिया है कि वे ग्राहकों की क्षमता ऑफ अटॉर्नी के अनुसरण में कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के किसी भी निर्देशों का पालन न करें. 

यह है मुद्दा : ग्राहकों के शेयरों का दुरुपयोग

ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर घोटाला है. सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं. मुद्दा सामने आने के बाद सेबी ने तुरंत असर से कंपनी को शेयर ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए नए ग्राहकों जोड़ने पर रोक लगा दी है.