आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रणब सेन ने कही ये बड़ी बात

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रणब सेन ने कही ये बड़ी बात

केंद्र सरकार की चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) घाटे की भरपाई की बाध्यता न होने पर राज्यों को ऊंची दरों पर उधार लेने के लिए विवश होना पड़ सकता है. 

आंकलन के मुताबिक राज्यों को कोरोना संकट के चलते करीब चार लाख करोड़ रुपये का कर घाटा सहना पड़ सकता है. जानकारों की राय में केन्द्र सरकार को कोई वैकल्पिक रास्ता तलाश कर राज्यों की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने हिन्दुस्तान से वार्ता में बोला कि केन्द्र सरकार राज्यों को महामारी के दौर में हो रहे घाटे की भरपाई के लिए बाध्य नहीं है. ऐसे में GST काउंसिल को चाहिए कि कुछ चीजों पर कर बढ़ाएं व राज्यों के घाटे की भरपाई करें. GST कानून में यह प्रावधान है कि घाटा होने की हालत में कर बढ़ाकर उसकी भरपाई की जा सकती है. हालांकि राज्यों के पास भी उधारी लेने का विकल्प हैं लेकिन वो उनके हित में नहीं रहेगा. उन्होंने ये भी सलाह दी है कि या तो केन्द्र सरकार या फिर GST काउंसिल को उधार लेकर राज्यों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा लेना चाहिए. 

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रणब सेन ने बोला कि कोरोना संकट के दौर में राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ता ही जा रहा है. उन्होंने बोला कि राज्यों को लोगों के उपचार के साथ साथ उन्हें रोजगार देने का भी खर्च उठाना पड़ रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में उन्हें आर्थिक मदद की ज्यादा आवश्यकता होगी. आंकलन है कि कोरोना महामारी से राज्यों को इस वर्ष कर में करीब 4 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा. 

प्रणब सेन ने ये भी बोला कि केन्द्र ने राज्यों को उधारी का विकल्प दिया है. लेकिन प्रदेश अगर उधार लेने जाते हैं तो उन्हें केन्द्र सरकार के मुकाबले महंगा लोन मिलेगा. साथ ही लोन का नुकसान राज्यों को लंबी अवधि तक उठाना पड़ेगा. ऐसे में उनकी दशा व बदतर होगी. उन्होंने सलाह दी है कि केन्द्र सरकार को ही राज्यों की आर्थिक मदद के लिए आगे व वित्त मंत्री को वैक्ल्पिक रास्ता तलाशते हुए राज्यों को धन मुहैया कराने का रास्ता तलाशना चाहिए.