आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने बोला, "खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से खुदरा महंगाई दर"

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने बोला,  "खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से खुदरा महंगाई दर"

आरबीआई ( ) की मौद्रिक नीति समिति ( Monetary Policy Committee ) ने गुरुवार को बोला कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से खुदरा महंगाई दर ( retail inflation rate ) में वृद्धि जारी रहने की आसार है. समिति ने हालांकि उल्लेख किया कि 2020-21 की दूसरी तिमाही से मुद्रास्फीति के लक्ष्य के अंदर रहने की आसार है. 

भारतीय रिजर्व बैंक ( rbi ) द्वारा मुद्रास्फीति के लिए लगाई जा रही उम्मीदें जरूरी हैं, क्योंकि गुरुवार को शीर्ष बैंक ने खुदरा कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए प्रमुख उधार दरों को कम करने में अस्थायी ठहराव लेने का निर्णय किया था.

समिति ने अपने बयान में कहा, "एमपीसी के फैसला में मुद्रास्फीति निकट अवधि में बढ़ रही है, लेकिन इसके 2020-21 की दूसरी तिमाही से लक्ष्य के अंदर रहने की आसार है." एमपीसी के अनुसार, दूसरी तिमाही के लिए असली मुद्रास्फीति के परिणाम मोटे तौर पर अनुमानों के अनुरूप विकसित हुए हैं. इनका औसत 3.5 प्रतिशत है, लेकिन अक्टूबर के लिए मुद्रास्फीति अपेक्षा से बहुत अधिक है.

नवंबर में वृहद-आर्थिक आंकड़ों से पता चला है कि खाद्य कीमतों में पर्याप्त वृद्धि ने हिंदुस्तान की अक्टूबर खुदरा मुद्रास्फीति को सितंबर की 3.99 प्रतिशत के मुकाबले अक्टूबर में 4.62 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. इन आंकड़ों ने इशारा दिया कि खुदरा मुद्रास्फीति के स्तर ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के लिए मध्यम अवधि के लक्ष्य को चार प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. इसके लिए दो प्रतिशत बढ़ोतरी या गिरावट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

आरबीआई की मौद्रिक समिति के बयान में बोला गया, "मुद्रास्फीति का ²ष्टिकोण कई कारकों से प्रभावित होने की आसार है. सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव तत्काल महीनों में जारी रहने की आसार है. आयात के जरिए आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार को फरवरी 2020 की आरंभ में सब्जियों की कीमतों में नरमी लाने में मदद करनी चाहिए."

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बयान में बोला गया, "इन कारकों को ध्यान में रखते हुए 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1-4.7 प्रतिशत व 2020-21 की पहली छमाही के लिए 4.0-3.8 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है, जिसमें जोखिम बहुत ज्यादा हद तक संतुलित है." भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए खुदरा मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रमुख ब्याज दरों को कम करने में अस्थायी ठहराव लिया है.