मध्य वर्ग की आय बढ़ाने को चाहिए सांस्थानिक ढांचा, जाने

मध्य वर्ग की आय बढ़ाने को चाहिए सांस्थानिक ढांचा, जाने

आर्थिक योगदान एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने हिंदुस्तान को सुझाव दिया है कि उसे गुणवत्तापूर्ण जॉब व आय में इजाफा करने के लिए व सुधारों की आवश्यकता है. संगठन ने बृहस्पतिवार को बोला कि सरकार की ओर से पूर्व में उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों का प्रभाव दिखने लगा है. 

ओईसीडी के अनुसार, कंपनी कर में कटौती व इंफ्रा क्षेत्र में किए गए सुधारों का फल मिलना प्रारम्भ हो गया है. लेकिन अभी व सुधारों की आवश्यकता है, ताकि गुणवत्ता वाले रोजगार व आय में बढ़ोतरी की जा सके. इस कदम से सार्वजनिक सेवा व जन कल्याण का दायरा भी बढ़ाया जा सकेगा. ओईसीडी की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जारी हालिया रिपोर्ट में बोला गया है कि अलबत्ता पिछले कुछ सालों से वैश्विक कारोबार में हिंदुस्तान की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन व्यक्तिगत निवेश लगातार निर्बल होता गया है. गुणवत्ता वाली नौकरियों की कमी के कारण बेरोजगारी दर बढ़ी है व ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमी आई है. इसके अतिरिक्त राज्यों के बीच प्रति आदमी आय में भी अंतर बहुत ज्यादा बढ़ गया है. ओईसीडी एक अंतर सरकारी संगठन है, जिसमें 36 देश शामिल हैं. 

5.8 प्रतिशत विकास दर अनुमान

ओईसीडी ने बोला है कि 2019-20 में हिंदुस्तान की विकास दर 5.8 प्रतिशत रहेगी. संगठन ने बोला कि उच्च स्तर पर वृद्धि को बहाल करना नौकरियों के सृजन के लिए महत्वपूर्ण है । साथ ही निवेश और निर्यात में तेजी लाने के लिए ढांचागत सुधारों को बढ़ाना होगा. इससे 2020-21 में हिंदुस्तान की विकास दर 6.2 प्रतिशत व 2021-22 में 6.4 प्रतिशत पहुंच सकती है. 

मध्य वर्ग की आय बढ़ाने को चाहिए सांस्थानिक ढांचा

वित्त मंत्रालय के दो पूर्व अधिकारियों ने अपनी किताब में बोला है कि हिंदुस्तान को मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए सांस्थानिक ढांचे की आवश्यकता है, क्योंकि हिंदुस्तान मध्य आय की उभरती अर्थव्यवस्था वाला देश है. सर्विस ऑफ द रिपब्लिक किताब में विजय केलकर व अजय शाह ने लिखा है कि 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ हिंदुस्तान अब मध्य आय की ओर बढ़ रहा है. हमने 1991 से 2011 के बीच तेज वृद्धि दर देखी है. हालांकि, अब विकास का यह फॉर्मूला पुराना हो गया है व सरकार को इस पर नए सिरे से विचार करना होगा. मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर देना होगा. पेट्रोलियम सचिव, वित्त सचिव व 13वें वित्त आयोग के चेयरमैन रहे केलकर ने बोला कि अभी हम कृषि क्षेत्र की गिरावट से जूझ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रदेश सरकारें भंडारण, वायदा बाजार, घरेलू व वैश्विक कारोबार में निर्बल होती जा रही हैं.