जीडीपी ग्रोथ 6 वर्ष में सबसे कम, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक घटा सकता है रेट

जीडीपी ग्रोथ 6 वर्ष में सबसे कम, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक घटा सकता है रेट

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद आज ब्याज दरों का ऐलान करेगा. प्रमुख दर रेपो रेट में फिर से 0.25% कटौती के संभावना हैं. रेपो रेट घटा तो ये लगातार छठी बार होगा. भारतीय रिजर्व बैंक इस वर्ष रेपो रेट में 1.35% कमी कर चुका है, मौजूदा दर 5.15% है. रेपो रेट घटने से इससे जुड़े लोन सस्ते हो जाएंगे.

जीडीपी ग्रोथ 6 वर्ष में सबसे कम, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक रेट घटा सकता है
आर्थिक विकास दर को गति देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) रेपो रेट में व कटौती का निर्णय ले सकती है. जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 4.5% रह गई. यह पिछले 6 वर्ष में सबसे कम है. रेपो रेट वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को लोन देता है. इस दर में कमी से बैंकों को सस्ता लोन मिलता तो उन पर ग्राहकों के लिए भी कर्ज़ की दरें घटाने का दबाव बढ़ता है.

आरबीआई ने रेपो रेट जितना कम किया बैंकों ने ग्राहकों को उतना लाभ नहीं दिया. इसलिए केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर से ब्याज दरों को रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी किया था. एसबीआई समेत प्रमुख बैंकों ने ब्याज दरों को रेपो रेट से लिंक करने का विकल्प चुना.