मंजूरी में देरी के चलते 355 परियोजनाओं की लागत बढ़ी, ओसीएमएस पर दी गई जानकारी के आधार पर सामने आई बात

मंजूरी में देरी के चलते 355 परियोजनाओं की लागत बढ़ी, ओसीएमएस पर दी गई जानकारी के आधार पर सामने आई बात

वित्तीय व प्रशासनिक वजहों से देरी के चलते केन्द्र सरकार की 355 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत लगभग 20.07 फीसद बढ़ कर 3.88 लाख करोड़ हो गई है. 

बुधवार को केंद्रीय सांख्यिकी एवं प्रोग्राम कार्यान्वयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा को यह जानकारी दी. राव इंद्रजीत सिंह ने बोला कि उनका मंत्रालय 150 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली केंद्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत व समय पर निगरानी रखता है. परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा मंत्रालय के औनलाइन कंप्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली (ओसीएमएस) पर दी गई जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है.

प्रश्नकाल के दौरान राव इंद्रजीत ने बताया कि जुलाई, 2019 की फ्लैश रिपोर्ट के मुताबिक 355 परियोजनाओं की लागत बढ़ी है व इनकी कुल लागत बढ़कर 3.88 लाख करोड़ हो गई है, जो 20.07 फीसद ज्यादा है. उन्होंने बताया कि धरती अधिग्रहण व फॉरेस्टर क्लीयरेंस में देरी की वजह से परियोजनाओं को पूरा करने का समय बढ़ जाता है व इसकी वजह से उसकी लागत भी बढ़ जाती है. सरकार ने समय व लागत को कम करने के लिए कई तरीका किए हैं. प्रगति प्रोग्राम के तहत समय-समय पर परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाती है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हर परियोजना की लागत में वृद्धि के कारण भिन्न-भिन्न हैं. इन कारणों में तकनीकी, वित्तीय व प्रशासनिक अड़चने शामिल हैं.

 

लेकिन मंत्रालय के ओसीएमएस पर परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक लागत में वृद्धि की मुख्य वजह मूल लागत का कम अनुमान, संसार भर में मुद्राओं की अस्थिरता, पर्यावरण तरीकों व पुनर्वास पर उच्च लागत है. मंत्री ने बोला कि धरती अधिग्रहण की बढ़ती लागत, कुशल श्रमिकों व मजदूरों की कमी, उपकरणों के किराए में वृद्धि व महंगाई की बढ़ती दर भी परियोजनाओं की लागत में वृद्धि की अन्य वजहें हैं.

 

महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट रोकने का अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा प्रभाव : भाजपा

भाजपा ने बोला है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग दो लाख करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को रोके जाने से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा. महाराष्ट्र बीजेपी के उपाध्यक्ष किरिट सोमैया ने सीएम उद्धव ठाकरे की मंशा पर सवाल उठाए हैं. सोमैया ने बोला कि दो लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर रोक लगाने के पीछे शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की गठबंधन सरकार की मंशा क्या है? इसकी वजह से परियोजना के समय व लागत में वृद्धि के लिए कौन जिम्मेदार होगा?बता दें कि सीएम बनते ही ठाकरे ने फड़नवीस सरकार द्वारा पिछले छह महीने के भीतर आवंटित परियोजनाओं की समीक्षा करने की बात कहते हुए उनपर रोक लगा दी थी. इसमें मुंबई मेट्रो के आरे पार्क में बनने वाले कारशेड का कार्य भी है. गठबंधन सरकार के मंत्री बुलेट ट्रेन को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं. सोमैया ने बोला कि कई परियोजनाओं में विदेशी कंपनियां भी साझीदार हैं. सरकार के इस निर्णय से विदेशी निवेश पर भी प्रभाव पड़ेगा.