पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने किया यह स्पष्ट, पेट्रोलियम ईंधनों पर कर घटाने का वैसे नहीं कोई प्रस्ताव

पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने किया यह स्पष्ट, पेट्रोलियम ईंधनों पर कर घटाने का वैसे नहीं कोई प्रस्ताव

पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम ईंधनों पर कर घटाने का वैसे कोई प्रस्ताव नहीं है. लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बोला कि किसी भी देश में पेट्रोल, डीजल की कीमतें स्थिर नहीं बनी रहती हैं. उन्होंने पेट्रोलियम ईंधनों को चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के सवाल पर कोई सीधा जवाब देने से परहेज किया.

वित्त मंत्री से पूछा गया था कि पेट्रोल, डीजल की कीमतों पर लगाम के लिए सरकार कर में कटौती पर विचार कर रही है या नहीं. कर कटौती की आसार खारिज करने के साथ-साथ वित्त मंत्री यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इन पर कोई नया कर लगाने पर भी विचार नहीं कर रही है. पेट्रोलियम ईंधनों को GST के दायरे में लाने के सवाल पर वित्त मंत्री ने बोला कि तकनीकी रूप से पेट्रोल, डीजल GST के शून्य दर वाली स्लैब में हैं. इसके तुरंत बाद उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि इस पर कोई भी निर्णय GST काउंसिल करेगी.

 

कॉरपोरेट कर कम करने के लिए संशोधन विधेयक पास

कॉरपोरेट कर की दर घटाने संबंधी कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2019 सोमवार को पांच घंटे की चर्चा के बाद लोकसभा से पारित हो गया. यह विधेयक उस अध्यादेश का जगह लेगा जिसमें कॉरपोरेट कर की दर घटाने का आदेश दिया गया था. देश में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सितंबर, 2019 में यह अध्यादेश लाया गया था. इसके जरिये देश में कॉरपोरेट कर की दर को 30 से घटाकर 22 फीसद व नयी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15 फीसद करने का एलान किया गया था.

इसका लाभ उठाने वाली कंपनियों को दूसरी कोई भी छूट नहीं मिलेगी. वित्त मंत्री ने बताया कि हिंदुस्तान में अब कॉरपोरेट कर की प्रभावशाली दर 34.94 फीसद से घटकर 25.17 फीसद हो गई है. नयी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए भी प्रभावशाली कर दर 17.16 फीसद होगी.

निवेश बढ़ने के मिल रहे इशारा : विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने बताया, ‘कॉरपोरेट कर की घटी दर के साथ हिंदुस्तान संसार के सबसे सुन्दर मैन्यूफैक्चरिंग स्थल के तौर पर उभर रहा है. कॉरपोरेट कर की दर घटाने के बाद देश में निवेश बढ़ने के इशारा मिलने लगे हैं. कई कंपनियों ने उनसे सम्पर्क किया है कि वे हिंदुस्तान में मैन्यूफैक्चरिंग को तैयार हैं. वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था में सुधार की बात भी कही. उन्होंने बोला कि कई मोर्चो से अच्छी खबरें आने लगी हैं. नवंबर में GST संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है. प्रत्यक्ष कर संग्रह भी पांच फीसद बढ़ा है.