भारत संचार निगम लिमिटेड को एक लाभदायक पीएसयू में करेगी तब्दील

भारत संचार निगम लिमिटेड को एक लाभदायक पीएसयू में करेगी तब्दील

भारत संचार निगम लिमिटेड व एमटीएनएल के 92 हजार कर्मचारियों ने वीआरएस अपनाया है. कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के बाद अब सरकार एमटीएनएल का भारत संचार निगम लिमिटेड में विलय करेगी तथा भारत संचार निगम लिमिटेड को एक लाभदायक पीएसयू में तब्दील करेगी. 

इस बात की जानकारी केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में दी.प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में प्रसाद ने बताया कि भारत संचार निगम लिमिटेड में एमटीएनएल के विलय का प्रभाव सारे देश में दिखाई देगा. इससे अन्य फायदों के अतिरिक्त आपरेशंस में तालमेल के अतिरिक्त स्थायी एवं ऊपरी खर्चो में कमी आएगी. विलय के परिणामस्वरूप दोनो कंपनियां ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेंगी.

पुनरुद्धार पैकेज के तहत दोनो कंपनियों के कर्मचारियों को 3 दिसंबर तक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना अपनाने का प्रस्ताव दिया गया था. संचार मंत्री ने बोला कि अधिक संख्या के कारण दोनो कंपनियों में कर्मचारियों पर होने वाला खर्च व्यक्तिगत टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले बहुत अधिक था. दोनो कंपनियों सरकार की रणनैतिक परिसंपत्ति हैं व सरकार इन्हें अधिक पेशेवर व लाभप्रद बनाएगी. संचार मंत्री के अनुसार कैबिनेट ने भारत संचार निगम लिमिटेड व एमटीएएल को 4जी स्पेक्ट्रम आबंटित करने की मंजूरी दी है. इससे अब वे देश भर के डेटा सेंट्रिक बाजारों में हाईस्पीड मोबाइल इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के साथ अपने ग्राहकों को ज्यादा संतुष्ट कर सकेंगी. भारत संचार निगम लिमिटेड सारे देश में जबकि एमटीएनएल केवल दिल्ली व मुंबई में आपरेट करती है.

 

प्रश्नकाल के दौरान जदयू मेम्बर राजीव रंजन तथा आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने दिल्ली-एनसीआर में कॉल ड्रॉप का मामला भी उठाया. राजीव रंजन ने भारत संचार निगम लिमिटेड को 'भाई साहब नहीं लगेगा' करार दिया तो जवाब में संचार मंत्री ने बोला कि इसे अच्छा करने के लिए एमटीएनएल में तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता है. लेकिन दिल्ली में मोबाइल टावर लगाना बहुत मुश्किल कार्य है. यहां तक कि संसद परिसर में टावर लगाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा.प्रसाद ने बोला कि दूरसंचार विभाग ने मोबाइल टावरों के विकिरण को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए बेहद कठोर नियम बनाए हैं. ये इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (आइसीआइआरपी) द्वारा निर्धारित मानकों से दस गुना कठोर हैं.