समझिए फैट का साइंस, अच्छे वसा व बुरे वसा का अंतर

समझिए फैट का साइंस, अच्छे वसा व बुरे वसा का अंतर

इस वाक्य पर गौर कीजिए जरा-‘कोई आदमी इसलिए मोटापे का शिकार नहीं है कि वह फैट (वसा) वाली चीजें खाता है, बल्कि इसलिए है, क्योंकि वह गलत फैट का सेवन कर रहा है.’ अक्सर हमने यही सुना है कि फैट यानी वसा स्वास्थ्य के लिए बुरी वस्तु है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. कुछ फैट स्वास्थ्य के लिए अच्छा व महत्वपूर्ण भी होता है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हेल्थ पोर्टल के अनुसार, ‘जब भी व जैसे भी संभव हुआ, हमने इसे अपने खान-पान से दूर करने की प्रयास की. आरंभ कम वसा वाले खाद्य पदार्थों से की, लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा करके हम अपनी स्वास्थ्य को लाभ नहीं पहुंचा सके. शायद इसलिए कि हमने अच्छे फैट को खुद से दूर कर लिया.’ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (यूएसए) के अनुसार, इसमें उपस्थित फैटी एसिड ब्रेन फंक्शन, मेंटल हेल्थ के साथ ही हड्डियों की मजबूती व कोशिकाओं की वृद्धि में मदद करते हैं.Image result for मोटापे के लिए जिम्मेदार वास्तविक फैट को पहचानें, फिर करें पक्का इलाज

समझिए फैट का साइंस

सभी तरह के फैट का बेसिक कम्पोनेंट होते हैं - एक कार्बन श्रृंखला व हाइड्रोजन परमाणु. कार्बन श्रृंखला की लंबाई व हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के कारण एक तरह का फैट दूसरे से भिन्न होने कि सम्भावना है. इसी कारण कुछ फैट स्वास्थ्य के लिए अच्छे तो कुछ बुरे हैं. फैट से शरीर को एनर्जी मिलती है. यह पूरी तरह प्रमाणित किया जा चुका है कि हमारे शरीर को वसा की जरूरत होती है, अच्छा उसी तरह जैसे उसे कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन की जरूरत होती है. फैट के कारण ही विटामिन ए, डी, ई, शरीर में प्रोसेस होते हैं. इसी कारण शरीर का ठंड से बचाव होता है, लेकिन ये सभी जरूरी काम स्वस्थ असंतृप्त वसा द्वारा किए जाते हैं.

अच्छे वसा व बुरे वसा का अंतर

दुनियाभर के व्यंजनों में दो मुख्य प्रकार के असंतृप्त वसा (अनसेचुरेटेड फैट) होते हैं: मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (एमयूएफए) व पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (पीयूएफए). प्रारम्भ से यूनानियों में दिल रोग की दर बहुत ज्यादा कम रही. इसका कारण जानने के लिए एक के बाद एक अध्ययन हुए. पता चला कि इसके पीछे जैतून का ऑयल है. इसमें एमयूएफए होता है, जो बहुत कम हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सिर्फ एक कार्बन से कार्बन डबल बॉन्ड बनाता है.

जब प्रत्येक कार्बन परमाणु के आसपास कई हाइड्रोजन परमाणु जमा हो जाते हैं, तो यह संतृप्त वसा बनाता है. कुल कैलोरी में संतृप्त वसा की मात्रा 10 फीसदी से कम रखना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. ज्यादा संतृप्त वसा व ट्रांस फैट स्वास्थ्य के लिए बुरे हैं. दोनों एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाते हैं - जो धमनियों को ब्लॉक करने व दिल रोगों को जन्म देने का कारण बनता है.

इनमें मिलता है स्वास्थ्य के लिए अच्छा फैट

आहार में थोड़ा-सा जैतून का तेल, मूंगफली का तेल, कैनोला तेल, एवोकाडो व नट्स शामिल करके अच्छा फैट हासिल किया जा सकता है. ओमेगा3 व ओमेगा6 दो प्रकार के पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जिन्हें हमारा शरीर अपने आप संश्लेषित या बना नहीं सकता है. पीयूएफए में कार्बन के दो या दो से अधिक बॉन्ड होते हैं, व यह हमारे दिल को स्वस्थ रखता है.

पीयूएफए के स्रोतों में शामिल हैं - वसायुक्त मछली, सोयाबीन व सूरजमुखी का तेल, अखरोट, फ्लैक्ससीड्स.

आप भी कर सकते हैं पहचान

अगर ठंडे होने के बाद मटन या सूखे मांस पर ग्रीस दिखाई देता है तो यह संतृप्त वसा (सेचुरेटेड फैट) है. यह कमरे के तापमान पर जम जाती है. संतृप्त वसा के अन्य स्रोत हैं, पनीर, नारियल का तेल, घी, सारे दूध के डेयरी उत्पाद व सभी वसायुक्त जंक फूड. ट्रांस फैट की थोड़ी मात्रा भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है. 2 फीसदी ट्रांस फैट से दिल रोग का खतरा 23 फीसदी बढ़ जाता है. अमेरिका में ट्रांस फैट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन हिंदुस्तान में ये चीजें धड़ल्ले से बिक रही हैं.