इस कंपनी ने 30,000 रुपये के निवेश को आज 1 करोड़ रुपये बना दिया, जानिए कैसे

इस कंपनी ने 30,000 रुपये के निवेश को आज 1 करोड़ रुपये बना दिया, जानिए कैसे

जी हां यह सच है कि एक कंपनी ने 30,000 रुपये के निवेश को आज 1 करोड़ रुपये बना दिया है। यह कंपनी है बाटा। हालांकि यह एक विदेशी कंपनी है, लेकिन भारत में यह घर-घर में जाना माना नाम है। देश में आए हुए इस कंपनी को 90 साल हो चुका है, लेकिन आज से 46 साल पहले इस कंपनी ने जून 1973 में भारतीय शेयर बाजार में कदम रखा था, और उस वक्त का 30 हजार रुपये का निवेश आज 1 करोड़ रुपये हो चुका है।

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भारत में दमदार उपस्थिति

बाटा के भारत में इस वक्त 1375 रिटेल स्टोर हैं। इन रिटेल स्टोर में करीब 8500 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। बाटा ने इस साल में अभी तक करीब 5 करोड़ जूते, चप्पल और सैंडल बेचे हैं। कंपनी की दुनिया के 90 देशों में उपस्थिति है। दुनियाभर में बाटा के करीब 30000 कर्मचारी हैं जो 5000 स्टोर चलाते हैं। बाटा के स्टोर पर रोज लगभग 10 लाख कस्टमर आते हैं।

ऐसे बनाया बाटा ने 30 हजार रुपये को 1 करोड़ रुपये
बाटा ने देश के शेयर बाजार में आज ही के दिन जून 1973 में कदम रखा था। कपंनी ने 30 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से निवेशकों को शेयर जारी किए थे। जिन लोगों ने उस वक्त 30,000 रुपये में बाटा के 1000 शेयर खरीदें होंगे, उनकी वैल्यू आज बढ़कर करीब 1 करोड़ रुपये हो चुकी है।

आज होंगे 7000 शेयर

जिन निवेशकों ने 1973 में कंपनी के 1000 शेयर खरीदें होंगे, उनके पास आज बाटा के 7000 शेयर होंगे। ऐसा इसलिए है कि कंपनी ने कई शेयर स्प्लिट किया है और बोनस शेयर भी दिए हैं। इसके चलते निवेशकों के पास 2015 तक 7000 शेयर हो गए हैं। बाटा ने 3 बार दिया राइट्स इश्यू भी दिया है, अगर किसी ने इस में भी शेयर लिए होंगे तो उनके पास और भी ज्यादा शेयर होंगे। इस प्रकार बाटा में निवेश करने वालों को पिछले 46 साल में करीब 333 गुना रिटर्न मिला है।

आजादी के पहले जापान से आते थे जूते

आजादी के पहले देश में जूते जापान से आते थे। इसी के चलते राजकपूर ने 'मेरा जूता है जापानी' गाया था, जो काफी चर्चित हुआ था। उस वक्त बाटा ने देश में कारोबार शुरू किया था। आज बाटा देश में जूते के बाजार में जाना माना नाम हो चुका है। यह मूलता चेक गणराज्य की की कंपनी है। थॉमस बाटा ने इस कंपनी की शुरुआत 1894 में की थी। बाद में यह कंपनी रबर और चमड़े की तलाश में दुनियाभर में गई और अंत में भारत में आकर इसकी खोज पूरी हुई। बाटा ने 1939 में कोलकाता से कारोबार शुरू किया था।