साबुन, टूथपेस्ट इन चीजों से स्त्रियों को होता है इस बिमारी का खतरा

साबुन, टूथपेस्ट इन चीजों से स्त्रियों को होता है इस बिमारी का खतरा

साबुन, टूथपेस्ट, हैंड सैनिटाइजर्स, प्रदूषित पानी व माउथवॉश जैसी चीजें प्रतिदिन प्रयोग की जाने वाली आम चीजे हैं. एक रीसेंट स्टडी की मानें तो इन चीजों से स्त्रियों को ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा होता है. रिपोर्ट्स की मानें तो इन कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स में उपस्थित ट्राइक्लोसैन इसकी वजह है. वैसे कैल्शियम की कमी से स्त्रियों को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है लेकिन स्टडी में पता चला कि स्त्रियों जो ऐंटीबैक्टीरियल साबुन, टूथ पेस्ट या व्यक्तिगत केयर प्रॉडक्ट्स का प्रयोग करती हैं उनसे खतरा बढ़ जाता है.

चीन के एक मेडिकल कॉलेज से यिनजुंग ली बताते हैं कि लैबोरेटरी स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ट्राइक्लोसैन से एनिमल्स की बोन मिनरल डेंसिटी पर बेहद बेकार प्रभाव पड़ता है. हालांकि ट्राइक्लोसैन व मनुष्यों की हड्डियों के बीच क्या रिलेशन है, इस बारे में कम ही पता चल पाया है. यह बात सामने आई कि जिन स्त्रियों के यूरिन में ट्राइक्लोसैन की मात्रा ज्यादा होती है, उनमें हडिड्यों से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखी गईं.

  • जब बात हेल्दी लिविंग के लिए हेल्दी हैबिट्स की आती है तो उसमें सबसे पहला नंबर आता है हैंडवॉशिंग का यानी हाथों को अच्छी तरह से साफ करना. अगर आपके हाथ साफ हैं तो आपके शरीर के अंदर कीटाणुओं के पहुंचने व फिर आपके बीमार पड़ने की संभावना कम हो जाती है. लेकिन हाइजीन के नाम पर इन दिनों हाथ धोने से जुड़े कई मिथक फैल रहे हैं जिनकी सच जानना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है
  • हकीकत- अगर आप ऐसा सोचते हैं कि सैनिटाइजर की एक बूंद आपकी हथेली के सभी किटाणुओं को मार देगी, तो आप गलत हैं. ज्यादातर सैनिटाइजर्स 60 प्रतिशतऐल्कॉहॉल के साथ आते हैं जो कि कीटाणुओं को पूरी तरह से मारने के लिए पर्याप्त नहीं होता है. बार-बार हाथ साफ करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करने से बैक्टीरिया इनके प्रति रेजिस्टेंट हो जाते हैं. ऐंटिबायॉटिक दवाओं का प्रभाव कम होने कि सम्भावना है. लिहाजा आवश्यकता न हो तो सैनिटाइजर की स्थान साधारण साबुन-पानी से हाथ धोएं. सैनिटाइजर्स जहां सिर्फ कुछ देर के लिए कीटाणुओं को मारता है वहीं साबुन-पानी से हाथ धोने से हाथ लंबे समय तक साफ व कीटाणुमुक्त रहते हैं.
  • हकीकत- क्या आपको भी ऐसा लगता है कि हर बात हाथ धोते वक्त कम से कम 1 मिनट तक हाथों को अच्छी तरह से रगड़कर धोना महत्वपूर्ण होता है. जी नहीं, यह एक मिथक है. हाथ को सिर्फ 20 सेकंड तक अच्छी तरह से रगड़कर साबुन-पानी से धो लें व आपके हाथ हो जाएंगे कीटाणुमुक्त. सैनिटाइजर यूज करने की बजाए 20 सेकंड के लिए साबुन से हाथ धोना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये हाथों के सेल की दीवार के अंदर पहुंचकर वायरस व बैक्टीरिया का खात्मा करता है.
  • हकीकत- हाथों को साफ करने के लिए ऐंटिबैक्टीरियल साबुन ही प्रयोग करना महत्वपूर्ण नहीं है. नियमित रूप से हैंडवॉश करने के लिए आप कोई भी साधारण साबुन चुन सकते हैं. ऐंटिबैक्टीरियल साबुन का प्रयोग सिर्फ बीमार लोगों के लिए या फिर ऐसे मरीजों के लिए होना चाहिए जिनकी इम्यूनिटी निर्बल है. अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं तो उन्हें छूने के बाद भी ऐंटिबैक्टीरियल साबुन यूज करें. हालांकि ऐंटिबैक्टीरियल प्रॉडक्ट्स का कम से कम यूज करना चाहिए अन्यथा ये स्किन पर उपस्थित हेल्दी बैक्टीरिया को भी मार देते हैं.
  • हकीकत- यह हकीकत है कि मॉइश्चर यानी नमी बैक्टीरिया को आकर्षित करती है, इसके बावजूद आपको दिन भर में कम से कम 6 बार हाथ जरूर धोना चाहिए. कम से कम खाना खाने के पहले व टॉइलट प्रयोग करने के बाद तो हैंडवॉश करना बेहद महत्वपूर्ण है. हालांकि जर्म्स के भय से बेहद हाथ धोना भी एक तरह का ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर है.

कुछ रिसर्चेज में यह भी सामने आया कि ट्राइक्लोसैन थायरॉइड व रिप्रोडक्टिव सिस्टम को भी प्रभावित करता है. हालांकि ट्राइक्लोसैन ऑस्टोयपोरोसिस के लिए सीधे जिम्मेदार होता है, इस बात को साबित करने के लिए अभी व रिसर्चेज की आवश्यकता है. हालांकि सावधानी के तौर पर इससे बचाव किया जा सकता है.

ये प्रॉडक्ट्स खरीदते समय आप लेबेल्स जरूर पढ़ें व प्रयास करें कि ट्राइक्लोसैन वाले साबुन, मंजन व माउथवॉश न खरीदें.