भारत के FDI पर टैक्स हैवन देशों का साया

भारत के FDI पर टैक्स हैवन देशों का साया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर राउंड ट्रिपिंग पर ध्यान केंद्रित किया है. हालांकि यह ध्यान महज ओवरसीज डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (ODI) के बारे में मौजूदा रेगुलेशन को स्पष्ट करने तक ही सीमित रहा है. गत 19 सितंबर को रिजर्व बैंक ने इस बारे में नया 'फ्रेक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चन्स' (FAQ) जारी कर यह साफ किया कि कोई भारतीय कंपनी किसी ऐसी विदेश स्थित कंपनी में हिस्सा नहीं खरीद सकती, जिसने पहले से ही किसी भारतीय कंपनी में 'ऑटोमेटिक रूट' से निवेश किया हो.

लेकिन इस बयान का कॉरपोरेट जगत में काफी विरोध हुआ. कॉरपोरेट जगत का कहना है कि इसका वाजिब निवेश पर काफी विपरीत असर पड़ेगा, जबकि तथ्य यह है कि यह फंड की राउंड ट्रिपिंग पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था और रिजर्व बैंक ने यह कहा था कि अगर कोई ऐसा लेन-देन मेरिट के अनुसार है तो उसके लिए उससे खासतौर से मंजूरी ली जा सकती है.

क्या होती है राउंड ट्रिपिंग

राउंड ट्रिपिंग का सरल मतलब है किसी व्यक्ति, धन, वस्तु आदि का उस स्थान पर वापस लौट आना, जहां से वह चला हो. काले धन के मामले में राउंड ट्रिपिंग तब होती है जब कंपनियां विभिन्न स्रोतों से धन किसी टैक्स हैवन देश में भेजती हैं और वहां से अन्य स्रोत से फिर वापस अपनी किसी भारतीय कंपनी में निवेश करा लेती हैं. इससे काले धन को तो सफेद बनाया ही जाता है, साथ में दोनों देशों में टैक्स भी बचाया जा सकता है. इसके कई स्रोत होते हैं जैसे किसी विदेशी फंड में निवेश करना, ग्लोबल डिपॉजिटरी रीसीट (GDR) या पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes) में निवेश करना और फिर विदेश स्थ‍ित फंड या कंपनी द्वारा वापस किसी भारतीय एसेट में निवेश करना.

फंड्स के राउंड ट्रिपिंग पर ध्यान

कॉरपोरेट द्वारा विरोध के आसार पहले से थे, क्योंकि आरबीआई, सेबी और ईडी जैसी रेगुलेटर और प्रवर्तन एजेंसियां पहले से ही कई राउड ट्रिपिंग और ओडीआई नियमों के अन्य उल्लंघन की जांच कर रही थीं. रिजर्व बैंक ने इस साल अप्रैल में ऐसे ही एक उल्लंघन को पकड़ा है और आठ अन्य मामलों की जांच कर रहा है. दो साल पहले सेबी ने राउड ट्रिपिंग के लिए 22 कंपनियों पर कार्रवाई की थी और 17.55 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

हालांकि, इंडस्ट्री और बैंकिंग सेक्टर के लोग इस खतरे को खारिज करते दिखते हैं. सीआईआई की चीफ इकोनॉमिस्ट बिदिशा गांगुली ने कहा कि एफडीआई आउटफ्लो (देश से बाहर जाने वाली) बहुत ज्यादा नहीं है और धीरे-धीरे यह घट रहा है. इसलिए वृहद आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो इस पर बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं है.

एसबीआई के ग्रुप इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने कहा कि राउंड ट्रिपिंग दुनिया भर में होती है और यह जगजाहिर है.