तीन में से दो बच्चों की मृत्यु का कारण बन रहा कुपोषण

तीन में से दो बच्चों की मृत्यु का कारण बन रहा कुपोषण

देश में हर तीन में से दो बच्चों की मृत्यु कुपोषण से हो रही है. हालांकि पांच साल तक के बच्चों की कुपोषण से मौत की दर में 1990 के मुकाबले 2017 में दो तिहाई की कमी आई है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर), पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की प्रतिनिधित्व में हुए अध्ययन में यह खुलासा हुआ. इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव के तहत किया गया यह अध्ययन मशहूर मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित हुआ है. इसके अनुसार, कुपोषण सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए बड़ा जोखिम है. बच्चों में यह खासतौर पर खतरनाक है. कुपोषण के संकेतकों में जन्म के समय शिशु का कम वजन मौत के बड़े कारणों में शामिल है.


अध्ययन के मुताबिक, हिंदुस्तान में 2017 में जन्म के समय शिशु का वजन बहुत कम होने के मुद्दे 21 प्रतिशत थे. उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 24% ऐसे शिशु जन्म लेते हैं. मिजोरम में ऐसे सबसे कम नौ प्रतिशत बच्चों ने जन्म लिया. 2017 में बच्चों के छोटे रहने के मुद्दे 39% रह गए. इसमें भी उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे बेकार है. यहां सबसे अधिक 49% बच्चे ठिगनेपन से पीड़ित रहे. वहीं, गोवा में यह आंकड़ा सबसे कम 21.3% रहा. इसी तरह 60% बच्चों में खून की कमी मिली. हरियाणा में सर्वाधिक 74% बच्चे पीड़ित मिले.

हिन्दीभाषी राज्यों में बदहाली

कुपोषण की स्थिति के आधार पर तीन श्रेणियां लो एसडीआई (सोशियो डेमोग्राफिक इंडेक्स) राज्य, मिडिल और हाई एसडीआई प्रदेश रखी गई थीं. इसमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड के अतिरिक्त सभी हिन्दी प्रदेश लो एसडीआई समूह में हैं. हरियाणा मिडिल व उत्तराखंड हाई एसडीआई राज्यों में रहे.

राज्यवार कुपोषण के संकेतक (आंकडे़ 2017 के, फीसदी में)

राज्य कम वजन ठिगनापन मोटापा खून की कमी

यूपी 24.2 49.0 13.0 66.7
बिहार 23.4 48.3 14.5 65.3
झारखंड 20.2 45.7 19.0 72.1
उत्तराखंड 22.6 32.4 11.1 62.5
दिल्ली 23.1 32.3 13.8 70.3