इसरो के वैज्ञानिक निश्चित ही हिंदुस्तान के पहले मून लैंडर की समस्या को दूर करने की प्रयास करेंगे, नोबेल पुरस्कार विजेता

इसरो के वैज्ञानिक निश्चित ही हिंदुस्तान के पहले मून लैंडर की समस्या को दूर करने की प्रयास करेंगे, नोबेल पुरस्कार विजेता

नोबेल पुरस्कार विजेता सर्जे हरोशे ने बुधवार को बोला कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) के वैज्ञानिक निश्चित ही हिंदुस्तान के पहले मून लैंडर की समस्या को दूर करने की प्रयास करेंगे. हरोशे के अनुसार विज्ञान हमें दंग करता रहता है-कभी इसमें असफलता मिलती है तो कभी सफलता.

हरोशे (75) ने यहां आयोजित 'नोबेल प्राइज सीरीज इंडिया 2019' समारोह से इतर आईएएनएस से कहा, “मैं नहीं जानता कि इसके (मून लैंडर विक्रम) के साथ क्या हुआ लेकिन वे निश्चित ही समस्या का निवारण करने की प्रयास करेंगे.”

भौतिकी के क्षेत्र में 2012 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले आशावादी हरोशे ने बोला कि विज्ञान में असफलता मिलती रहती है. हरोशे ने कहा, “विज्ञान कुछ ऐसा है जहां आप अज्ञात में जाते हैंआप दंग होते हैं, कई बार सकारात्मक रूप से व कई बार निगेटिव रूप से.”

उन्होंने साफ तौर पर बोला कि मून लैंडर के साथ वास्तव में क्या हुआ उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. उपकरण ने अंतिम चरण तक कार्य किया था व फिर 'आपके सामने किसी तरह की असफलता आ जाती है.'

उन्होंने बोला कि समस्या यह थी कि इस अभियान से बेहद उम्मीद थी व मीडिया का ध्यान अत्यधिक रूप से इस अभियान की ओर था व जब-जब असफलता होती है तो बड़े पैमाने पर निराशा फैलती है व वही हुआ.

उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि जो लोग इस क्षेत्र में कार्य करते हैं उन्हें जानना चाहिए कि इसमें असफलता मिलती है. विज्ञान में क्योंकि बहुत सारा पैसा लगा रहता है, इसे अर्थ व पॉलिटिक्स से लेना देना होता है व मैं इस मिलावट को पसंद नहीं करता.”

उन्होंने कहा, “एक देश जो बेहतर निवेश कर सकता है उसे युवा दिमागों में निवेश करना चाहिए. यह हिंदुस्तान के लिए जरूरी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसकी आबादी का एक बड़ा धड़ा हिंदुस्तान वापस लौट आए क्योंकि हमें इनलोगों की यहां आवश्यकता है.”

हरोशे ने कहा, “भारत में हमारे पास गणित में बेहतरीन एजुकेशन है, सैद्धांतिक भौतिकी व खगोल भौतिकी में, मुझे लगता है कि छोटे पैमाने के भौतिकी प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा लगाना चाहिए चाहे भले ही इस पर मून लैंडिंग जैसी बड़ी परियोजना की तरह मीडिया का ध्यान न हो.”