अयोध्या जमीन टकराव को लेकर तीन-चार दिन में उच्चतम न्यायालय अपना निर्णय सुना सकेंगे

अयोध्या जमीन टकराव को लेकर तीन-चार दिन में उच्चतम न्यायालय अपना निर्णय सुना सकेंगे

अयोध्या जमीन टकराव (Ayodhya land dispute) को लेकर अगले तीन-चार दिन में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) अपना निर्णय सुना सकता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उससे पहले ही वो इस मसले पर जजमेंट देंगे। इतिहास के सबसे लंबे टकराव पर निर्णय का पूरा देश इंतजार कर रहा है। इस बीच हम अपने पाठकों को मुद्दे से जुड़े रहे लोगों से रूबरू करवा रहे हैं। ऐसे ही लोगों में शामिल थे केके नायर (K. K. Nayar)।Related image

अयोध्या के विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए उस वक्त के पीएम जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) ने दो बार आदेश दिए लेकिन अयोध्या के डीएम ने दोनों बार उनके आदेश का पालन करवाने में असमर्थता जताकर बड़े हिंदूवादी चेहरे के रूप में पहचान बनाई। डीएम के रूप में यहां केके नायर तैनात थे। डीएम व उनकी पत्नी ने बाद में चुनाव लड़ा व लोकसभा पहुंचे जबकि उनका ड्राइवर भी इस इमेज का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचने में सफल रहा।

विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए नेहरू ने दो बार आदेश दिए थे



जब मूर्तियां रखी गईं!

साल 1949 में 22 व 23 दिसंबर की आधी रात मस्जिद (Masjid) के अंदर कथित तौर पर चोरी-छिपे रामलला की मूर्तियां रख दी गईं। अयोध्या में शोर मच गया कि जन्मभूमि में भगवान प्रकट हुए हैं। मौक़े पर तैनात कांस्टेबल के हवाले से लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस घटना की सूचना कांस्टेबल माता प्रसाद ने थाना इंचार्ज राम दुबे को दी। ‘50-60 लोगों का एक समूह परिसर का ताला तोड़कर, दीवारों व सीढ़ियों को फांदकर अंदर घुस आया व श्रीराम की प्रतिमा स्थापित कर दी। साथ ही उन्होंने पीले व गेरुआ रंग में श्रीराम लिख दिया। ’

दक्षिण के निवासी ने उत्तर में बनाई पहचान

‘युद्ध में अयोध्या’ नामक अपनी किताब में हेमंत शर्मा ने मूर्ति से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का ज़िक्र किया है। उनके मुताबिक, "केरल के अलेप्पी के रहने वाले केके नायर 1930 बैच के आईसीएस अफ़सर थे। फ़ैज़ाबाद के ज़िलाधिकारी रहते इन्हीं के कार्यकाल में बाबरी ढांचे में मूर्तियां रखी गईं या यूं कहें इन्होंने ही रखवाई थीं। बाबरी मुद्दे से जुड़े आधुनिक हिंदुस्तान के वे ऐसे शख्स हैं जिनके कार्यकाल में इस मुद्दे में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया व देश के सामाजिक- सियासी ताने-बाने पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ा। ”

1949 में फैजाबाद के डीएम रहे केके नायर की कहानी!

"नायर 1 जून 1949 को फ़ैज़ाबाद के कलेक्टर बने। 23 दिसंबर 1949 को जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में स्थापित हुईं तो उस वक्त के पीएम जवाहरलाल नेहरू ने यूपी के सीएम गोविंद बल्लभ पंत से फौरन मूर्तियां हटवाने को कहा। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटवाने का आदेश दिया, लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट केकेके नायर ने दंगों व हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के भय से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई। ”

पति-पत्नी दोनों बने सांसद

शर्मा लिखते हैं “जब नेहरू ने दोबारा मूर्तियां हटाने को बोला तो नायर ने सरकार को लिखा कि मूर्तियां हटाने से पहले मुझे हटाया जाए। देश के सांप्रदायिक माहौल को देखते हुए सरकार पीछे हट गई। डीएम नायर ने 1952 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। चौथी लोकसभा के लिए वे यूपी की बहराइच सीट से जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचे। इस इलाके में नायर हिंदुत्व के इतने बड़े प्रतीक बन गए कि उनकी पत्नी शकुंतला नायर भी कैसरगंज से तीन बार जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचीं। उनका ड्राइवर भी यूपी विधानसभा का मेम्बर बना। "

अयोध्या के पांव पखारती सरयू

विवादित स्थल से मूर्तियां न हटाए जाने के विरूद्ध मुसलमानों में तीखी रिएक्शन हुई। उन्होंने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों ने न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। फिर सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया।