वाहन सेक्टर की मांग पर विचार करेगा मंत्रालय

वाहन सेक्टर की मांग पर विचार करेगा मंत्रालय

ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ओला, उबर भी जिम्मेदार है। जी हां बीते मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वाहन क्षेत्र में नरमी के कारणों में युवाओं की सोच में बदलाव भी है। लोग अब खुद का वाहन खरीदकर मासिक किस्त देने की बजाय ओला और उबर जैसी ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं के जरिये वाहनों की बुकिंग को तरजीह दे रहे हैं।

वाहन सेक्टर पर कई चीजों का असर

इसका असर वाहन सेक्टर पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि वाहन सेक्टर पर कई चीजों का असर पड़ा है। इनमें बीएस-6 को लागू करने का लक्ष्य, रजिस्ट्रेशन शुल्क का मुद्दा और युवा वर्ग की सोच शामिल है। युवा वर्ग वाहन खरीदने के लिए ईएमआई का भुगतान करने के चक्र में नहीं फंसना चाहता है और ओला या उबर या मेट्रो का उपयोग करने को तरजीह दे रहा है। इस पर कांग्रेस ने हालांकि सीमारमण के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्या वह बसों और ट्रकों की बिक्री में गिरावट को भी युवा वर्ग के व्यवहार में आए बदलाव से जोड़ती हैं।

सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर मीडिया को सरकार के कामों का ब्योरा दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दो दशकों की सबसे बड़ी मंदी से जूझ रहे ऑटोमोबाइल क्षेत्र कि मांगों पर सरकार जरूर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय वाहन क्षेत्र के कुछ सुझावों पर पहले ही विचार कर चुकी है, आगे कुछ अन्य सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी। ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया जाए। उनका कहना हैं कि इस उद्योग को फिर से पटरी पर लाने के लिए उसकी मांगों पर वह विचार करेगी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय वाहन क्षेत्र के कुछ सुझावों पर पहले ही विचार कर चुकी है।

अगस्त महीने में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

भारतीय वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन (सियाम) ने सोमवार को अगस्त महीने के बिक्री आँकड़े जारी किए थे। इसके अनुसार, बिक्री में 1997-98 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त माह के दौरान वाहनों की कुल बिक्री पिछले साल के इसी माह की 23,82,436 की तुलना में 23.55 फीसदी घटकर 18,21,490 वाहन रह गई। घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री तो 31.57 फीसदी घटकर दो लाख से भी कम 1,96,524 वाहन रह गई। देश की अग्रणी यात्री कार कंपनी मारुति सुजुकी की बिक्री अगस्त में 36.14 फीसदी कम रही।