यूपी को छोड़ बाकी राज्यों में चीनी उत्पादन की गति बहुत धीमी, जाने क्यों

यूपी को छोड़ बाकी राज्यों में चीनी उत्पादन की गति बहुत धीमी, जाने क्यों

चालू पेराई सीजन में यूपी को छोड़ बाकी राज्यों में चीनी उत्पादन की गति बहुत धीमी है. यही वजह है कि पिछले वर्ष के मुकाबले चीनी का उत्पादन बहुत कम हुआ है. कम उत्पादन का अनुमान व चीनी निर्यात सौदा पक्का होने का प्रभाव घरेलू चीनी मार्केट पर पड़ना तय है.

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के जारी आंकड़ों के मुताबिक 30 नवंबर तक चालू सीजन (2019-20) में एक सौ से ज्यादा चीनी मिलों में पेराई चालू ही नहीं हो सकी है. यही वजह है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस अवधि में मात्र 18.85 लाख टन चीनी का उत्पादन हो पाया है. जबकि पिछले वर्ष की इस अवधि तक 41 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था. इसकी वजह बड़ी संख्या में चीनी मिलें पेराई शुरु नहीं कर पा रही हैं. पिछले वर्ष (2018) में इस अवधि तक 418 मिलों में पेराई चालू हो गई थी, जबकि इस बार अभी तक केवल 279 मिलों में चीनी का उत्पादन होना शुरु हुआ है.

 

उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 111 मिलों में पेराई हो रही है, जिससे अब तक 10.81 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है. जबकि पिछले वर्ष प्रदेश में अब तक 105 मिलों में ही पेराई शुरु हो सकी थी, जिससे 9.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था. इसके मुकाबले चीनी उत्पादन में दूसरे सबसे बड़े प्रदेश महाराष्ट्र में 30 नवंबर तक 43 मिलों में केवल 67 हजार टन चीनी का उत्पादन हो सका है, जबकि पिछले वर्ष अब तक 175 मिलें खुल गई थीं. इनमें कुल 18.89 लाख टन चीनी का उत्पादन हो गया था.

 

कर्नाटक की 61 मिलों में चालू सीजन में पेराई चल रही है, जिससे वहां 5.21 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है. पिछले वर्ष यहां 63 मिलों में पेराई शुरु हो गई थी, जिससे 8.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हो गया था. गुजरात में पिछले वर्ष जहां 16 मिलों ने दो लाख टन चीनी का उत्पादन कर लिया था, वहीं चालू सीजन में 14 मिलें चल रही है, जिनमें 75 हजार टन चीनी का उत्पादन हो सका है.

चीनी मार्केट के सूत्रों की मुताबिक 15 लाख टन चीनी का निर्यात सौदा पक्का हो चुका है. यह चीनी ईरान, श्रीलंका, अफगानिस्तान व अफ्रीकी राष्ट्रों में जा रही है. उद्योग सूत्रों के मुताबिक 30 नवंबर तक देश के सभी गन्ना उत्पादक राज्यों में किसानों का बकाया 8000 करोड़ रुपये है. माना जा रहा है कि चीनी मूल्य में सुधार होने से एरियर का भुगतान करने में सरलता होगी.