फर्जी बीमा दावा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से सुप्रीम कोर्ट नाराज

फर्जी बीमा दावा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से सुप्रीम कोर्ट नाराज

उच्चतम न्यायालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मामले में अधिवक्ताओं पर ही आरोप है।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि यह यूपी बार काउंसिल की ओर से उदासीनता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। कोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा को इस पर गौर करने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा कि ऐसे में यह राज्य की बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे दायर करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बार काउंसिल आफ स्टेट कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और इसलिए अब बार काउंसिल आफ इंडिया को कदम उठाना होगा और गलती करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।


शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी 15 नवंबर को या उससे पहले सीलबंद लिफाफे में जांच के संबंध में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की ओर से दायर एक पूरक हलफनामे पर ध्यान दिया जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।


पीठ ने कहा कि एसआइटी को कुल 1,376 शिकायतें/संदिग्ध दावों के मामले प्राप्त हुए हैं। यह कहा गया है कि एसआइटी द्वारा प्राप्त संदिग्ध दावों के कुल 1,376 मामलों में से अब तक संदिग्ध दावों के 246 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है और प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने के बाद कुल 166 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ संज्ञेय अपराध जिसमें याचिकाकर्ता, अधिवक्ता, पुलिस कर्मी, डाक्टर, बीमा कर्मचारी, वाहन मालिक आदि शामिल हैं।


शीर्ष अदालत ने अपने 5 अक्टूबर के आदेश में इस दलील का भी संज्ञान लिया कि अब तक दर्ज कुल आपराधिक शिकायतों में से 33 आपराधिक मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 2015 से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये के नुकसान से संबंधित मामलों की करने के लिए इलाहाबाद एचसी द्वारा पारित आदेश के अनुसार एसआइटी का गठन किया गया था और इसके बावजूद जांच आज तक पूरा नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसआईटी ने भी त्वरित कार्रवाई नहीं की और जांच पूरी नहीं की।


भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

अफगानिस्‍तान की स्थिति पर द‍िल्‍ली में अगले महीने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक होनी है। इसकी मेजबानी भारत करेगा। इस बैठक में कई अन्‍य देशों के साथ रूस और पाकिस्‍तान को भी न्‍योता दिया गया है। बैठक की अध्‍यक्षता भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल करेंगे। माना जाता है कि इस क्षेत्रीय सम्‍मेलन में चीन, इरान, तजाकिस्‍तान और उजबेकिस्‍तान को भी बुलाया गया है। इसमें अफगानिस्‍तान में मानवीय संकट के मसलों पर बातचीत होगी। साथ ही सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। 


प्रस्तावित वार्ता 10-11 नवंबर को हो सकती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक यह सम्मेलन 2019 में ईरान में पहले आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के समान प्रारूप में होगा। एनएसए-स्तरीय बैठक में आमंत्रित लोगों में अफगानिस्तान के पड़ोसी देश- रूस, चीन, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। पता चला है कि उस आमंत्रण को पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ को भी दे दिया गया है, हालांकि सम्मेलन और आमंत्रण पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, पता चला है कि तैयारी चल रही है।


तालिबान से दुनिया को जैसी अपेक्षाएं हैं, उसके बारे भी अवगत कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि जिन देशों के एनएसए को आमंत्रित किया गया है, उन्‍हें पहले ही भारत से निमंत्रण मिल चुका है। हालांकि, इस कॉन्‍फ्रेंस में तालिबान को न्‍योता नहीं दिया गया है। यह बैठक नवंबर के दूसरे हफ्ते में प्रस्‍तावित है।

रूस ने भी 20 अक्‍टूबर को मॉस्‍को में इसी तरह का सम्‍मेलन रखा है। इसमें भारत के साथ-साथ उसने तालिबान को भी बुलाया है। हालांकि, भारत सरकार तालिबान को यहां बुलाने को लेकर अभी असमंजस में है। कारण है कि तालिबान को अभी अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। खासतौर से मानवाधिकार से जुड़े मसलों को लेकर अभी उससे कहीं ज्‍यादा अपेक्षा हैं। इनमें महिलाओं, बच्‍चों और अल्‍पसंख्‍यकों के मानवाधिकार शामिल हैं।


यह देखना दिलचस्‍प होगा कि पाकिस्‍तान कॉन्‍फ्रेंस में क्‍या भूमिका अदा करता है। देखने वाली बात तो यह भी होगी कि पाकिस्‍तानी एनएसए मोईद यूसुफ आते हैं कि नहीं। अगर ऐसा होता है तो 2016 में अमृतसर में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश सलाहकार सरताज अजीज के बाद दोनों ओर से यह किसी उच्‍चाधिकारी का पहला दौरा होगा। इस साल मई में भी भारत ने अफगानिस्‍तान पर कॉन्‍फ्रेंस का प्रस्‍ताव किया था। तब भी यूसुफ को न्‍योता दिया गया था। हालांकि, दिल्‍ली में कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह बैठक नहीं हो पाई थी।