समाजवादी पार्टी नवनिर्वाचित जिला और महानगर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव लड़ने की नहीं देगी इजाजत

समाजवादी पार्टी नवनिर्वाचित जिला और महानगर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव लड़ने की नहीं देगी इजाजत

समाजवादी पार्टी नवनिर्वाचित जिला और महानगर अध्यक्षों को विधानसभा चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देगी। पार्टी इस समय संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। संगठन के अहम पदों पर आसीन पदाधिकारियों को पूरा समय संगठनात्मक गतिविधियों में देना होगा, ताकि बीजेपी को मजबूती से जवाब दिया जा सके। संगठन व जनप्रतिनिधियों को एक दूसरे का पूरक बनाने की रणनीति पर समाजवादी पार्टी संगठनात्मक ढांचा तैयार कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते दिनों पार्टी की ओर से जारी जिलाध्यक्षों की पहली सूची में 15 अध्यक्ष, चार उपाध्यक्ष और एक महामंत्री के नामों की घोषणा की गई थी। इसमें पार्टी के मूल वोटबैंक को जोड़े रखने के साथ अन्य वर्गों को भी अगुवाई दिया गया। सूत्र बताते हैं कि इस माह के अंत तक अधिकांश जिलों में संगठन तैयार हो जाएगा व ब्लाक कमेटियों के गठन की आरंभ भी कर दी जाएगी। फ्रंटल संगठनों के पुनर्गठन का काम भी शुरुआत होगा।

 

चुनावी सीजन में संगठन का कार्य प्रभावित न हो, इसलिए पदाधिकारियों की नियुक्ति से पूर्व उनकी चुनावी मंशा भी जानी जा रही है। खासकर जिलाध्यक्षों को टिकट न मांगने का लिखित वचन देना होगा। प्रदेश संगठन के एक पूर्व पदाधिकारी का बोलना है कि चुनाव के समय अध्यक्ष ही टिकट पाने की कतार में लग जाता है तो संगठन में बिखराव शुरुआत होता है, जिसका नुकसान चुनाव में उठाना पड़ता है। वहीं बीएसपी व बीजेपी जैसी पार्टियां संगठन पर ही अधिक ध्यान देती हैं। वहां पूर्णकालिक पदाधिकारियों की व्यवस्था चुनावों में उम्मीदवारों के लिए वरदान सिद्ध होती है।