मार्च की गर्मी ने बनाया रिकॉर्ड, 121 वर्ष के इतिहास में तीसरा सबसे गर्म महीना

मार्च की गर्मी ने बनाया रिकॉर्ड, 121 वर्ष के इतिहास में तीसरा सबसे गर्म महीना

नई दिल्ली मौसम विभाग (India Meteorological Department) ने बताया है कि बीता मार्च महीना ऐतिहासिक तौर पर गर्म रहा है विभाग के अनुसार बीते 121 सालों में ये मार्च काी तीसरा सबसे गर्म महीना (third warmest March) है विभाग की रिव्यू मीटिंग के दौरान सामने आया कि मार्च महीने में पूरे देश का अधिकतम औसत तापमान 32.65 डिग्री सेल्सियस रहा है

विभाग ने बताया है कि मार्च महीने के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया  विभाग ने बोला कि इस बार का मार्च महीना बीते 11 सालों में सबसे अधिक गर्म रहा है इससे पहले 2010 में देश का औसत अधिकतम तापमान 33.09 और 2004 में 32.82 रहा था इस बार होली पर भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया मार्च के महीने में ही मई जैसी गर्मी का अहसास हुआ होली के दिन दिल्ली के सफदरजंग में 40.1 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया यह 1945 के बाद मार्च महीने में सबसे अधिक तापमान रहा है बढ़ते तापमान ने लोगों का चिंता बढ़ा दी है

76 वर्षों में पहली बार हुआ है, जब मार्च में दिल्ली का तापमान 40 के पार गया
ऐसा 76 वर्षों में पहली बार हुआ है, जब मार्च में दिल्ली का तापमान 40 के पार गया है देश की राजधानी में तापमान सामान्य से 8 डिग्री अधिक रिकॉर्ड किया गया है लोग गर्मी से विचलित देखे गए
29 मार्च को दिल्ली का पारा 40.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया
मौसम विज्ञानियों की मानें तो दिल्ली में वर्ष 1945 के बाद पहली बार गर्मी में इतनी तेजी देखी गई है 29 मार्च को दिल्ली का पारा 40.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था मार्च के महीने में पहली बार दिल्ली में लू चलने जैसी गर्म हवा महसूस की गई इसके पहले इसकाा आभास आम तौर पर अप्रैल में ही होता रहा है


दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

धरती के अधिकांश संसाधनों पर कब्जा जमाने वाले दुनिया के अमीर देशों की हनक आपदा के समय में भी दिख रही है। कोविड-19 महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए वैक्सीन ही एकमात्र जीवन की किरण बनकर सामने आई है, लेकिन असमान वितरण ने महामारी से लड़ाई की चुनौती को कठिन बना दिया है।

अब तक दुनिया की पांच फीसद आबादी का टीकाकरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस पांच फीसद आबादी में अमीर-गरीब की गहरी खाई नजर आ रही है। ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार गुरुवार तक दुनिया को दी गई कुल वैक्सीन की खुराक में 40 फीसद हिस्सेदारी सिर्फ 27 अमीर देशों की है जिनकी वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी महज 11 फीसद है। पेश है एक नजर:

वितरण की असमानता

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के आंकड़े बताते हैं कि उच्च आय वाले इन देशों में कम आय वाले देशों के मुकाबले 25 गुना तेज टीकाकरण हो रहा है। कम धनी और दुनिया की आबादी में दूसरा 11 फीसद का हिस्सा रखने वाले देशों के हिस्से अभी तक सिर्फ 1.6 फीसद ही वैक्सीन आई है। ट्रैकर के अनुसार दुनिया के 154 देशों में 72.60 करोड़ वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है।


आबादी और टीकाकरण का अनुपात

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार अगले तीन महीने में अमेरिका की 75 फीसद आबादी को टीके लगाए जाने का लक्ष्य है। विडंबना यह है कि दुनिया के करीब आधे देश अभी ऐसे हैं जहां की एक फीसद आबादी का भी टीकाकरण नहीं संपन्न हो पाया है। टीकाकरण में यह असमानता तब है जब दुनिया के 40 सबसे गरीब देशों के पास टीकाकरण का डाटा सार्वजनिक करने के लिए उपलब्ध ही नहीं है। इन देशों की वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी आठ फीसद है।


अफ्रीका महाद्वीप में सबसे कम टीकाकरण

दुनिया का सबसे गरीब महाद्वीप अफ्रीका में टीकाकरण भी सबसे कम है। इसके 54 देशों में से सिर्फ तीन में एक फीसद से अधिक आबादी को टीके लगाए जा सके हैं। इनमें से 20 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां टीकाकरण का खाता ही नहीं खुला है।

क्या हो तरीका


अभी ऐसी कोई प्रणाली नहीं विकसित है जो दुनिया भर में वैक्सीन के समान वितरण को सुनिश्चित करा सके। यदि दुनिया की सभी वैक्सीन का वितरण आबादी के आधार पर किया जाए तो अपने वास्तविक हिस्से के मुकाबले अमेरिका छह गुना अधिक खुराक लगा लगाएगा। ब्रिटेन आबादी के अनुपात में सात गुना अधिक टीके का इस्तेमाल करेगा। इस आशय की सूची में संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल शीर्ष पर है जो अपनी आबादी के हिसाब से हिस्से के क्रमश: नौ और 12 गुने टीकाकरण करेंगे। चीन में टीकाकरण की रफ्तार दुनिया के औसत के करीब है। यहां दुनिया का 20 फीसद टीका दुनिया की 18 फीसद आबादी को लगाया जा रहा है।


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