एंग्लो भारतीय समुदाय के सदस्यों का नामांकन बंद होने कि सम्भावना, ये हैं कारण

एंग्लो भारतीय समुदाय के सदस्यों का नामांकन बंद होने कि सम्भावना, ये हैं कारण

लोकसभा (Lok Sabha) व विधानसभा में एंग्लो भारतीय समुदाय (Anglo Indian, Community) के सदस्यों का नामांकन बंद होने कि सम्भावना है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा में एंग्लो भारतीय समुदाय के सदस्यों का नामांकन बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है। 

हालांकि लोकसभा में एससी व एसटी के रिज़र्वेशन (Reservation) केा 10 वर्ष तक के लिए बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। में इन श्रेणियों के लिए रिज़र्वेशन 25 जनवरी, 2020 को खत्म होना था।

में से 2 एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित की जाती हैं। इन दोनों सीटों के लिए राष्ट्रपति एंग्लो भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को नामित करते हैं। सूत्रों के मुताबिक आगे से लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामित मेम्बर नहीं रहेंगे। एंग्लो-इंडियन का मतलब उन हिंदुस्तानियों से होता है जो ब्रिटिश मूल के हैं। बताया जाता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को नामित किया था हालांकि दूसरे कार्यकाल में किसी भी नाम पर चर्चा नहीं की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकसभा व विधानसभा में एंग्लो भारतीय समुदाय के सदस्यों के लिए रिज़र्वेशन कुछ समय के लिए किया गया था। सरकार के मुताबिक एंग्लो भारतीय समुदाय बहुत ज्यादा अच्छा कर रहा था व उसे अब रिज़र्वेशन की जरूरत नहीं थी। बताया जाता है कि अगर बाद में रिज़र्वेशन की आवश्यकता समझी जाती है तो इस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

किसे बोला जाता है एंग्लो इंडियन
संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत एंग्लो भारतीय ऐसे आदमी को माना जाता है जो हिंदुस्तान में रहता हो व जिसका पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों। यह शब्द मुख्य रूप से ब्रिटिश लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो कि हिंदुस्तान में कार्य कर रहे हों व भारतीय मूल के हों।