दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


मंदिरों में सलाहकार समिति का गठन करेगी तमिलनाडु सरकार, नोबेल सम्मानित डुफ्लो भी होंगी शामिल

मंदिरों में सलाहकार समिति का गठन करेगी तमिलनाडु सरकार, नोबेल सम्मानित डुफ्लो भी होंगी शामिल

तमिलनाडु की नवनिर्वाचित द्रमुक सरकार राज्य के लिए वृहत्तर स्वायत्तता हासिल करने के साथ ही केंद्र के साथ सहयोगपूर्ण संबंध के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में नई सरकार बनने के बाद 16वीं विधानसभा के पहले औपचारिक संबोधन में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राज्य सरकार की नीतियों को रेखांकित किया। राज्यपाल ने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी बड़े हिंदू मंदिरों में राज्य स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि कोविड-19 की तीसरी लहर से मुकाबला करने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। सरकार ने केंद्र से टीका आवंटन बढ़ाने का आग्रह किया और कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

राज्यपाल ने कहा, 'यह सरकार राज्य के लिए वृहत्तर स्वायत्तता के अंतिम लक्ष्य को हासिल करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संवैधानिक तरीके से यह सरकार केंद्रीय स्तर पर वास्तविक संघवाद की स्थापना का प्रयास करेगी। मजबूत राज्यों को मजबूत केंद्र बनाने की जरूरत है। यह सरकार राज्यों के अधिकार के पक्ष में मजबूती से खड़ी रहेगी और ऐसे अधिकारों में किसी प्रकार के हस्तक्षेप का संवैधानिक तरीके से विरोध करेगी।'

आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल होंगी नोबेल सम्मानित डुफ्लो

राज्यपाल ने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के लिए एक आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन करने जा रही है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी की नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एस्थेर डुफ्लो इसकी सदस्य बनाई जाएंगी। फ्रांसीसी-अमेरिकी अर्थशास्त्री डुफ्लो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी में गरीबी उन्मूलन एवं विकास अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं। अन्य सदस्यों में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन, विकास अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव एस. नारायणन शामिल होंगे।

परिषद की सिफारिश पर सरकार आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के कदम उठाएगी और सुनिश्चित करेगी कि विकास का लाभ समाज के सभी तबकों तक पहुंचे। राज्य की अर्थव्यवस्था चिंताजनक है। सरकार इसमें सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करेगी और कर्ज का बोझ कम करेगी। तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर जुलाई में एक श्वेत पत्र जारी किया जाएगा।


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