पश्चिम बंगाल में फूट गया दीदी ओ दीदी का बुलबुला

पश्चिम बंगाल में फूट गया दीदी ओ दीदी का बुलबुला

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतगणना के रुझानों से साफ हो गया है कि राज्य में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो रही है। मतगणना की शुरुआत में तो भाजपा तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देती दिखी मगर धीरे-धीरे टीएमसी ने अपनी ताकत दिखाने के साथ 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली।

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पश्चिम बंगाल की चुनावी सभाओं में दोहराया जाने वाला जुमला दीदी ओ दीदी भी चर्चाओं में आ गया है। रुझानों से साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में दीदी ओ दीदी नहीं बल्कि दीदी ही दीदी दिखाई दे रही हैं। विपक्ष की ओर से पीएम मोदी के दीदी ओ दीदी वाले जुमले पर तंज भी कसा गया है।

पीएम मोदी का दीदी ओ दीदी का जुमला

पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड के अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़ी चुनावी रैलियां की थीं। अपनी इन चुनावी रैलियों में पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर करारा हमला बोला था। चुनावी रैलियों में दोहराया जाने वाला पीएम मोदी का जुमला दीदी ओ दीदी काफी चर्चित हो गया था। अब पीएम मोदी के इस जुमले को लेकर भी वार किया जाने लगा है।

अखिलेश यादव ने कसा पीएम के जुमले पर तंज

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीएम मोदी के जुमले की याद दिलाते हुए ममता बनर्जी और टीएमसी को बंगाल की जीत के लिए बधाई दी है। उन्होंने दीदी ओ दीदी के जुमले पर तंज भी कसा है।

अपने ट्वीट में अखिलेश यादव ने लिखा है कि भाजपाइयों की ओर से एक महिला पर किए गए अपमानजनक कटाक्ष दीदी ओ दीदी का जनता ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट के साथ दीदी जिओ दीदी हैशटैग का इस्तेमाल किया है।

जुमला बोलने वाला दादा कहां गया

टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दीदी ओ दीदी के जुमले को लेकर जोरदार पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी माने जाने वाली काकोली ने दीदी ओ दीदी जुमले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है। काकोली ने इस बाबत ट्वीट करते हुए कहा कि दीदी ओ दीदी बोलने वाला दादा आखिरकार कहां चला गया। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि दादा शब्द का उल्लेख काकोली ने किसके लिए किया है। काकोली ने पीएम मोदी के इस्तीफे वाले हैशटैग का इस्तेमाल किया है।

भाजपा ने झोंक दी थी पूरी ताकत

दरअसल पश्चिम बंगाल क विधानसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी थी और पीएम मोदी सहित पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने बंगाल में भाजपा को जिताने के लिए खूब मेहनत की थी। पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बंगाल में रोड शो और रैलियों के जरिए हवा का रुख भाजपा के पक्ष में मोड़ने के लिए जी तोड़ मेहनत की थी।

धरा रह गया अमित शाह का दावा

चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न चैनलों से बातचीत में शाह ने भाजपा को 200 से अधिक सीटें मिलने का दावा किया था। उनका कहना था कि पार्टी ने इसके लिए जमीनी स्तर पर काम किया है।

पार्टी इस बार के चुनाव में अपनी ताकत दिखाने में कामयाब रहेगी मगर मतगणना के रुझानों से साफ हो गया है कि भाजपा स्थिति का आकलन करने में पूरी तरह नाकामयाब रही और दीदी ने बंगाल में एक बार फिर अपनी ताकत दिखा दी। यही कारण है कि पीएम मोदी के दीदी और दीदी के जुमले को लेकर अब जोरदार पलटवार किया गया है।


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


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