ताड़मेटला की बरसी कल, शहीद हुए थे 76 जवान, जानें- कैसे नक्सलियों ने रची थी हमले की साजिश

ताड़मेटला की बरसी कल, शहीद हुए थे 76 जवान, जानें- कैसे नक्सलियों ने रची थी हमले की साजिश

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले केतर्रेम की घटना की वजह से प्रदेश के बस्तर संभाग में नक्सली हिंसा की चर्चा फिर देशभर में हो रही है। हालांकि यहां के नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी घटना छह अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी। इसमें सीआरपीएफ के 75 और जिला बल के एक जवान शहीद हो गए थे। बस्तर में वैसे तो हर साल मार्च से जून के बीच बड़ी नक्सल वारदातें होती है पर ताड़मेटला का जिक्र आते ही आज भी लोग सिहर उठते हैं।

नक्सलियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ की कंपनी पर हमला किया और जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नक्सली गर्मी में टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चलाते हैं। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देख पाना संभव होता है। नदी-नाले सूखने के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है। नक्सली साल भर अपनी मांद में दुबककरसाथियों की मौत, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को चुपचाप देखते हैं। बाद में टीसीओसी में पलटवार करते हैं। अभी उनका टीसीओसी का सीजन ही चल रहा है। इस दौरान उन्होंने नारायणपुर में ब्लास्ट कर पांच जवानों की हत्या की। तर्रेम में घात लगातार 22 जवानों की हत्या की। टीसीओसी के दौरान 15 मार्च 2008 को बीजापुर के रानीबोदली कैंप में हमला किया जिसमें 55 जवान शहीद हुए। 2013 में 25 मई को झीरम में कांग्रेस के काफिले पर हमला कर 31 लोगों की हत्या की। 2017 में 25 अप्रैल को सुकमा के बुरकापाल में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए। 23 मार्च 2020 को मिनपा में 17 जवान शहीद हुए। यह सूची काफी लंबी है पर ताड़मेटला की घटना भयावह थी।


खुले मैदान में घिरे थे जवान

चिंतलनार कैंप से करीब पांच किमी दूर ताड़मेटला गांव के पास गश्त कर रहे सीआरपीएफ के जवान नक्सलियों के झांसे में आकर जंगल के अंदर घुसे थे। वहां पेड़ों के पीछे नक्सलियों ने मोर्चा बना रखा था, जबकि जवान खुले मैदान में जाकर फंस गए। सुबह छह बजे शुरू हुई यह मुठभेड़ मुश्किल से एक घंटे ही चली थी। घायल जवान जब वायरलेस सेट पर पानी-पानी चीख रहे थे तो चिंतलनार थाने के एक हवलदार से रहा न गया। वह बख्तरबंद गाड़ी में पानी लेकर निकला। नक्सलियों ने वाहन को ब्लास्ट से उड़ा दिया। घटना के बाद पांच घायल ही बच पाए। बाकी सभी शहीद हो चुके थे।

प्रेस कांफ्रेंस कर दिखाए थे हथियार

ताड़मेटला में नक्सलियों ने जवानों के 80 हथियार भी लूट लिए थे। घटना के कुछ दिन बाद उसी इलाके के जंगलों में उन्होंने मीडिया को बुलाकर लूटे हथियारों की प्रदर्शनी लगाई थी। इस वारदात के बाद फोर्स ने रणनीति में बदलाव किया पर हर बार नक्सली नई रणनीति लेकर सामने आते रहे। घटना की जांच कई बार हुई। इस वारदात के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बंद कमरे में हुआ। इन सबका क्या नतीजा हुआ यह कभी पता नहीं चला।


दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

धरती के अधिकांश संसाधनों पर कब्जा जमाने वाले दुनिया के अमीर देशों की हनक आपदा के समय में भी दिख रही है। कोविड-19 महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए वैक्सीन ही एकमात्र जीवन की किरण बनकर सामने आई है, लेकिन असमान वितरण ने महामारी से लड़ाई की चुनौती को कठिन बना दिया है।

अब तक दुनिया की पांच फीसद आबादी का टीकाकरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस पांच फीसद आबादी में अमीर-गरीब की गहरी खाई नजर आ रही है। ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार गुरुवार तक दुनिया को दी गई कुल वैक्सीन की खुराक में 40 फीसद हिस्सेदारी सिर्फ 27 अमीर देशों की है जिनकी वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी महज 11 फीसद है। पेश है एक नजर:

वितरण की असमानता

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के आंकड़े बताते हैं कि उच्च आय वाले इन देशों में कम आय वाले देशों के मुकाबले 25 गुना तेज टीकाकरण हो रहा है। कम धनी और दुनिया की आबादी में दूसरा 11 फीसद का हिस्सा रखने वाले देशों के हिस्से अभी तक सिर्फ 1.6 फीसद ही वैक्सीन आई है। ट्रैकर के अनुसार दुनिया के 154 देशों में 72.60 करोड़ वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है।


आबादी और टीकाकरण का अनुपात

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार अगले तीन महीने में अमेरिका की 75 फीसद आबादी को टीके लगाए जाने का लक्ष्य है। विडंबना यह है कि दुनिया के करीब आधे देश अभी ऐसे हैं जहां की एक फीसद आबादी का भी टीकाकरण नहीं संपन्न हो पाया है। टीकाकरण में यह असमानता तब है जब दुनिया के 40 सबसे गरीब देशों के पास टीकाकरण का डाटा सार्वजनिक करने के लिए उपलब्ध ही नहीं है। इन देशों की वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी आठ फीसद है।


अफ्रीका महाद्वीप में सबसे कम टीकाकरण

दुनिया का सबसे गरीब महाद्वीप अफ्रीका में टीकाकरण भी सबसे कम है। इसके 54 देशों में से सिर्फ तीन में एक फीसद से अधिक आबादी को टीके लगाए जा सके हैं। इनमें से 20 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां टीकाकरण का खाता ही नहीं खुला है।

क्या हो तरीका


अभी ऐसी कोई प्रणाली नहीं विकसित है जो दुनिया भर में वैक्सीन के समान वितरण को सुनिश्चित करा सके। यदि दुनिया की सभी वैक्सीन का वितरण आबादी के आधार पर किया जाए तो अपने वास्तविक हिस्से के मुकाबले अमेरिका छह गुना अधिक खुराक लगा लगाएगा। ब्रिटेन आबादी के अनुपात में सात गुना अधिक टीके का इस्तेमाल करेगा। इस आशय की सूची में संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल शीर्ष पर है जो अपनी आबादी के हिसाब से हिस्से के क्रमश: नौ और 12 गुने टीकाकरण करेंगे। चीन में टीकाकरण की रफ्तार दुनिया के औसत के करीब है। यहां दुनिया का 20 फीसद टीका दुनिया की 18 फीसद आबादी को लगाया जा रहा है।


आज है अप्रैल माह का पहला प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व       क्या आप भी करते हैं खाना खाते समय ये गलतियां तो मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज       गुरुवार को रखने जा रहे हैं व्रत तो इन बातों का रखें खास ख्याल       करें काले तिल के ये उपाय, घर में आती है सुख-समृद्धि       कब से शुरू हो रहा है रमजान का पवित्र महीना, जानें यहां       ताइवान अधिकारी के साथ सरकार के संबंधों को मिलेगा बढ़ावा       अमेरिका-ईरान के बीच अगले सप्ताह शुरू होगी वार्ता, परमाणु समझौते का मुख्य बिंदु       कोरोना संक्रमण के चलते दूसरे देशों को टीके की आपूर्ति कम कर सकता है भारत : गावी प्रमुख       अमेरिकी सांसद ने 'क्वाड प्लस फ्रांस' नौसेना अभ्यास को सराहा       वर्जीनिया में एलजी पद की दौड़ में शामिल पुनीत अहलूवालिया के पक्ष में उतरे कपिल देव       मध्य प्रदेश सीएम शिवराज ने बढ़ते कोविड मामलों पर जताई चिंता, बोले...       दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण       बढ़ते संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर RT- PCR परीक्षण की तैयारी       आम की यह किस्म बारहों महीने देती है फल, राजस्थान के इस किसान ने किया विकसित       झारखंड और यूपी के कई इलाकों में हुई बारिश, जानें अपने राज्य का मौसम       पेट्रोल डीजल की खूब बचत करती हैं ये 4 कारें, इनका माइलेज है सबसे ज्यादा       नई किआ Seltos से लेकर हुंडई Alcazar तक, अप्रैल में लॉन्चिंग को तैयार ये धाकड़ एसयूवीज !       इन SUVs को जमकर खरीद रहे ग्राहक, कीमत है कम और फीचर्स हैं ज्यादा       फ्यूल सेविंग गैजेट्स के बारे में ये बाते नहीं जानते होंगे आप, जानें       ये हैं भारत की सबसे सस्ती फैमिली कारें, 7 लोगों का परिवार आसानी से हो जाएगा इनमें फिट