सिद्धू की कांग्रेस हाईकमान को धमकी; कहा- पंजाब मॉडल को लागू करने की गारंटी मिलने पर ही लड़ूंगा चुनाव

सिद्धू की कांग्रेस हाईकमान को धमकी; कहा- पंजाब मॉडल को लागू करने की गारंटी मिलने पर ही लड़ूंगा चुनाव

पंजाब के लुधियाना में मंगलवार को व्यापारियों से मिलने पहुंचे पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने एक तरह से पार्टी हाईकमान को सीधी धमकी दे डाली। सिद्धू ने कहा कि अगर कांग्रेस हाईकमान उनके पंजाब मॉडल को लागू करने की गारंटी देगा तो ही वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। हाईकमान ने मंजूरी नहीं दी तो वह किसी बात के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

सिद्धू ने लुधियाना में व्यापारियों के साथ बैठक के दौरान अपना पंजाब मॉडल उनके सामने भी रखा। सिद्धू ने अपने पंजाब मॉडल के जरिए प्रदेश को तरक्की की राह पर ले जाने और आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया। सिद्धू ने कहा कि 2007 से 2017 के दौरान अकाली-भाजपा सरकार ने पंजाब में इन्वेस्टमेंट को लेकर बड़े-बड़े दावे किए मगर प्रदेश में कोई बड़ी इन्वेस्टमेंट नहीं आई। 2015 की इन्वेस्ट समिट में 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए आने का वादा किया गया, लेकिन 6 हजार करोड़ रुपए ही आ पाए। पिछले साढ़े 4 साल में कांग्रेस पार्टी की सरकार होते हुए भी सही ढंग से काम नहीं हुआ। सिंगल विंडो के माध्यम से मुख्यमंत्रियों ने सभी विभाग अपने हाथ में रखे, जिसे अब बदला जाएगा।

सिद्धू ने कहा कि वह पंजाब की बेहतरी के लिए लोगों के सुझाव लेने के लिए डिजिटल पोर्टल ला रहे हैं। व्यापारी अपने सुझाव और एक बार फिर उन्हें मौका जरूर दें। सिद्धू ने व्यापारियों से कहा कि उन्होंने दो बार अकाली दल और एक बार कांग्रेस की सरकार बनवाई। इस बार आम लोगों की सरकार बनाने के लिए उनका साथ दें। इसी मीटिंग में चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा और महासचिव पंकज शर्मा ने सिद्धू को ज्ञापन सौंपा।

खुद को अगले मुख्यमंत्री की तरह पेश करते दिखे सिद्धू सिद्धू मंगलवार को दिनभर खुद को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करते हुए दिखे। पहले पत्रकारों के सामने अपने पंजाब मॉडल की बात की और फिर पार्षदों के साथ बैठक में भी इसी पर बात करते दिखे। बाद में व्यापारियों से भी बार-बार कहते रहे कि वह पंजाब मॉडल को प्रदेश में लागू करेंगे और हाईकमान से इसकी मंजूरी लेंगे।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

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नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।