झारखंड और यूपी के कई इलाकों में हुई बारिश, जानें अपने राज्य का मौसम

झारखंड और यूपी के कई इलाकों में हुई बारिश, जानें अपने राज्य का मौसम

देश के कई राज्यों में तेजी से मौसम बदल रहा है। जहां एक तरफ उत्तर भारत में गर्मी से लोगों का बेहाल होना शुरू हो चुका है वहीं कई राज्यों में हल्की बारिश से लोगों को थोड़ी राहत मिली है। बीते दिन मौसम विभाग द्वारा की गई भविष्यवाणी के मुताबिक, झारखंड में रिमझिम बारिश की फुहारों ने मौसम खुशनुमा बना दया है। इसके साथ ही आज भी यहां पर कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मौसम में भी बदलाव दर्ज किया गया है। कई दिन तेज धूप और उमस भरे मौसम के बाद शुक्रवार दोपहर अचानक बारिश शुरू हो गई। सुलतानपुर व अमेठी समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई है। 

अप्रैल के दूसरे हफ्ते में बदला मौसम का मिजाज

अप्रैल महीने का दूसरा हफ्ता शुरू होते ही देशभर में मौसम का मिजाज लगभग बदलने लगा है। तेज़ गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बारिश ने कई इलाकों में राहत प्रदान की है। शहरी इलाकों में तो लोग इन बारिश का लुत्फ उठा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में किसानों के लिए ये मौसम मुसीबत बना हुआ है। बेमौसम बारिश के चलते गेहूं की कटाई और इसे तैयार करने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 


यहां पर अगले 4 दिनों तक होगी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक पूर्व और मध्य भारत में अगले 4 दिनों तक बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं भी चल सकती है। छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा सहित कर्नाटक में में भी अगले दो दिनों तक बारिश के आसार जाताए जा रहे हैं।

पश्चिमी विछोभ के चलते बदला मौसम


मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विछोभ के कारण मौसम में यह अचानक से बदलाव देखने को मिल रहा है।  अधिकतक राज्यों में दिए गए बारिश के अलर्ट के बाद अधिकतम तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।

भागलपुर में भी बदला मौसम 

भागलुपर के मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं न्यूनतम तापमान स्थिर रहेगा। मौसम विभाग की तरफ से यह जानकारी दी गई है।


दिल्ली-NCR में जल्द शुरू होगा लू का कहर

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आने वाले दिनों में राजधानी दिल्ली में लोगों को लू का सामना करना पड़ेगा। 11 और 12 अप्रैल के आसपास दिल्ली में अधिकतम तापमान 40 तक पहुंचने के साथ ही लू चलने की संभावना जताई जा रही है। 


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


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